कोलकाता : कलकत्ता हाईकोर्ट ने बैंक खातों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि केवल किसी खाते को ‘म्यूल अकाउंट’ बताए जाने के आधार पर बैंक उसे फ्रीज नहीं कर सकते।
अदालत के अनुसार, यदि किसी खाते के जरिए अवैध धन के लेन-देन या मनी लॉन्ड्रिंग का संदेह है, तो बैंक को नियमानुसार कार्रवाई करते हुए संदिग्ध लेन-देन की रिपोर्ट (STR) वित्तीय खुफिया इकाई यानी FIU को भेजनी होगी।
केवल संदेह के आधार पर खाते पर रोक उचित नहीं
म्यूल अकाउंट आमतौर पर ऐसे बैंक खाते को कहा जाता है, जिसका इस्तेमाल अवैध रूप से हासिल धन को प्राप्त करने, दूसरे खातों में भेजने या धन को वैध दिखाने के लिए किया जाता है। अदालत ने संकेत दिया कि केवल आरोप या संदेह के आधार पर ग्राहक के बैंक खाते पर रोक लगाना उचित नहीं होगा। बैंकिंग संस्थानों को निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है।
संदिग्ध लेन-देन पर STR दाखिल करना जरूरी
हाईकोर्ट ने कहा कि यदि बैंक को किसी खाते में संदिग्ध गतिविधि नजर आती है, तो उसे Suspicious Transaction Report (STR) दाखिल करने की प्रक्रिया अपनानी होगी। ऐसी रिपोर्ट Financial Intelligence Unit (FIU) को भेजी जाती है।
अदालत का यह रुख बैंकिंग व्यवस्था में जांच और कार्रवाई के बीच उचित प्रक्रिया बनाए रखने की जरूरत को रेखांकित करता है।
खाताधारकों के अधिकारों की सुरक्षा पर जोर
फैसले को बैंक ग्राहकों के अधिकारों की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत के रुख से स्पष्ट है कि वित्तीय अपराधों पर कार्रवाई जरूरी है, लेकिन इसके लिए तय कानूनी प्रक्रिया का पालन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इससे उन खाताधारकों को राहत मिल सकती है, जिनके खाते केवल संदेह या ‘म्यूल अकाउंट’ के आरोप के चलते प्रतिबंधित कर दिए जाते हैं।