अर्पिता सरकार का फाइल फोटो 
कोलकाता सिटी

मंत्री उमेश राय के बेटे को हनीट्रैप में फांसना चाहते थे आतंकी!

हनीट्रैप नेटवर्क में शामिल हमीम की महिला मित्र झारखंड से गिरफ्तार

3 महीने से मंत्री के बेटे से संपर्क कर रही थी अर्पिता

दीपक, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : बर्दवान से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से कथित संबंधों के आरोप में गिरफ्तार हमीम मंडल की महिला मित्र अर्पिता सरकार को भी राज्य पुलिस के स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने गिरफ्तार कर लिया है। एसटीएफ ने शुक्रवार की देर रात झारखंड के साहिबगंज के बहरवा थाना क्षेत्र में एक विशेष अभियान चलाकर उसे गिरफ्तार कर लिया। जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि अर्पिता और हमीम के बीच पिछले चार वर्षों से गहरे संबंध थे और दोनों मिलकर हनीट्रैप के जरिए संवेदनशील जानकारियां जुटाने वाले एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा थे। एसटीएफ के अनुसार अर्पिता मूलत: झारखंड की रहनेवाली है। उसने ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है। वह बंगाल में अपने रिश्तेदारों से मिलने आया करती थी। इस दौरान ही उसकी मुलाकात हमीम से भी होती थी। शनिवार को अर्पिता को अदालत में पेश करने पर उसे 14 दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।

इंस्टाग्राम के जरिए मंत्री के बेटे को फंसा रही थी जाल में !

एसटीएफ के अनुसार हमीम ने अपनी महिला मित्र अर्पिता सरकार को एक मंत्री उमेश राय के पुत्र को हनीट्रैप में फंसाने का खास टास्क सौंपा था। जांच एजेंसियों का मानना है कि इसके पीछे एक सुनियोजित और संगठित नेटवर्क सक्रिय था, जिसका मुख्य उद्देश्य देश की सुरक्षा से जुड़ी गोपनीय सूचनाएं हासिल करना था। एसटीएफ के अनुसार हमीम और अर्पिता को हनीट्रैप का निर्देश पाकिस्तान में बैठे उनके हैंडलर से सीधे तौर पर मिला था। आईजी एसटीएफ ने बताया कि हमीम मंडल की दोस्ती 4 साल पहले इंस्टाग्राम के जरिए अर्पिता से हुई थी। बाद में दोनों प्यार करने लगे। हमीम से अर्पिता इतना प्रभावित थी कि उसके कहने पर वह हनीट्रैप के काम पर भी लग गयी थी। काफी हद तक उसने मंत्री के बेटे से दोस्ती भी करने की कोशिश की। हालांकि इससे पहले ही जांच एजेंसियों ने उनपर शिकंजा कस दिया।

एंक्रिप्टेट चैट के जरिए पाकिस्तान हैंडर से करते थे बातचीत

जांच के दौरान यह बात भी सामने आई है कि अर्पिता पिछले तीन महीनों से कथित तौर पर ‘शहजाद भट्टी ग्रुप’ के संपर्क में थी। एसटीएफ का दावा है कि हमीम और अर्पिता दोनों ही पाकिस्तानी हैंडलरों के सीधे संपर्क में रहकर नापाक गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे। सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बचने के लिए यह पूरा गिरोह वॉट्सएप, टेलीग्राम, सेशन और एलिमेंट जैसे अत्याधुनिक एवं एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के जरिए आपस में बातचीत करता था। हालांकि शुरू में यह साफ नहीं है कि अर्पिता को इस गैंग में शामिल होने के लिए ब्रेनवॉश किया गया था या उसे गैंग से कोई फाइनेंशियल फायदा हो रहा था। फिलहाल एसटीएफ अधिकारी अर्पिता और हमीम को आमने सामने बैठाकर पूछताछ करेंगे और सच्चाई का पता लगाएंगे। इसके अलावा राज्य में सक्रिय उनके गिरोह के अन्य सदस्यों का पता लगाया जा रहा है।

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