कोलकाता सिटी

कोलकाता में ANNANTAA माइंडस्पेस 2026

मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भविष्य की दिशा पर मंथन

सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : बदलते कॉरपोरेट परिवेश में मानसिक स्वास्थ्य की बढ़ती अहमियत को केंद्र में रखते हुए ANNANTAA – पावर ऑफ द माइंड की पहल पर ANNANTAA माइंडस्पेस 2026: ए कॉन्क्लेव ऑफ लीडरशिप, इनोवेशन एंड वेलबीइंग का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में उद्योग जगत के वरिष्ठ प्रतिनिधियों, कॉरपोरेट लीडर्स, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित वक्ताओं ने भाग लेकर इस बात पर विचार साझा किए कि भविष्य के सफल संगठनों की नींव केवल नवाचार और बेहतर प्रदर्शन नहीं, बल्कि कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक रूप से सक्षम नेतृत्व और संवेदनशील कार्यसंस्कृति पर भी आधारित होगी।

सम्मेलन की शोभा पूर्व हिडको अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी देबाशीष सेन की उपस्थिति ने बढ़ाई। उनके साथ डेंट्सू इंडिया के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अभिजान नंदी, इंडस नेट टेक्नोलॉजीज़ के निदेशक शांतनु मुखर्जी, एलटीएम की वाइस प्रेसिडेंट सोनाली भट्टाचार्य, जेआईएस ग्रुप के जनरल मैनेजर (कॉर्पोरेट कम्युनिकेशंस एवं पीआर) के. सुनील कुमार, कॉलियर्स इंटरनेशनल के मैनेजिंग डायरेक्टर अनिर्बाण गुप्ता, आईबीएम के सीनियर प्रोजेक्ट मैनेजर पिजुष रंजन घोष तथा एका फाउंडेशन के संस्थापक एवं निदेशक युवराज कपाड़िया सहित कई विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए।

सम्मेलन के दौरान पैनल चर्चाओं, प्रेरक कीनोट सत्रों और संवादात्मक परिचर्चाओं के माध्यम से कार्यस्थल पर मानसिक स्वास्थ्य के बदलते स्वरूप और उससे जुड़ी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई। वक्ताओं ने सहानुभूतिपूर्ण नेतृत्व, भावनात्मक बुद्धिमत्ता और सहयोगात्मक कार्यसंस्कृति को भविष्य के संगठनों की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया। "ब्रिजिंग द वर्ल्ड्स ऑफ एकेडेमिया एंड मेंटल वेलनेस" विषय पर आयोजित विशेष सत्र में प्रो. शबीना ओमर और युवराज कपाड़िया ने इस बात पर जोर दिया कि शैक्षणिक संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य को शिक्षा प्रणाली का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए, ताकि विद्यार्थी भावनात्मक रूप से सशक्त बन सकें और स्वस्थ शैक्षणिक वातावरण विकसित हो।

सम्मेलन में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़ों का भी उल्लेख किया गया, जिनके अनुसार कार्यशील आयु वर्ग के लगभग 15 प्रतिशत वयस्क किसी न किसी मानसिक स्वास्थ्य समस्या से प्रभावित हैं। वहीं अवसाद और चिंता जैसी स्थितियों के कारण हर वर्ष लगभग 12 बिलियन कार्य दिवसों का नुकसान होता है। इन तथ्यों ने यह स्पष्ट किया कि मानसिक स्वास्थ्य अब केवल कर्मचारी कल्याण का विषय नहीं, बल्कि संगठनों की उत्पादकता, नवाचार और दीर्घकालिक सफलता का प्रमुख आधार बन चुका है।

एका फाउंडेशन के संस्थापक एवं निदेशक युवराज कपाड़िया ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य अब व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी है। उनके अनुसार ऐसे कार्यस्थलों का निर्माण आवश्यक है, जहां प्रत्येक व्यक्ति स्वयं को सुरक्षित, सम्मानित और समर्थ महसूस करे, क्योंकि मानसिक स्वास्थ्य में किया गया निवेश मजबूत टीमों, प्रभावी नेतृत्व और टिकाऊ भविष्य की नींव रखता है।

Annantaa की संस्थापक एवं मनोवैज्ञानिक माधुरी सरदा ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य जीवन, कार्यशैली और नेतृत्व का मूल आधार है। उन्होंने बताया कि इस सम्मेलन का उद्देश्य संगठनों को केवल प्रदर्शन नहीं, बल्कि लोगों को भी समान महत्व देने के लिए प्रेरित करना था। वहीं विधि बंसल, को-फाउंडर एवं साइकोथेरेपिस्ट, ने कहा कि जब कर्मचारी स्वयं को सुरक्षित, समर्थ और सुना हुआ महसूस करते हैं, तभी संगठन वास्तविक रूप से प्रगति करते हैं।

विचारोत्तेजक चर्चाओं और सार्थक संवादों के साथ संपन्न हुए ANNANTAA माइंडस्पेस 2026 ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि भविष्य का नेतृत्व केवल तकनीक और नवाचार से नहीं, बल्कि मानसिक रूप से स्वस्थ और संवेदनशील कार्यस्थलों के निर्माण से तय होगा। सम्मेलन ने प्रतिभागियों को ऐसी कार्यसंस्कृति विकसित करने के लिए प्रेरित किया, जहां व्यक्ति और संगठन दोनों समान रूप से आगे बढ़ सकें।

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