सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : बुलिंग हमेशा मारपीट या सीधी धमकी जैसी नहीं दिखती, कई बार यह बच्चे के चुप रहने, स्कूल जाने से बचने या आत्मविश्वास खोने के रूप में सामने आती है। इसी पहलू पर ध्यान केंद्रित करने के लिए अनंता ने अर्ली चाइल्डहुड एसोसिएशन (ECA) के साथ मिलकर ‘सेफ स्कूल्स, स्ट्रॉन्गर माइंड्स’ कॉन्क्लेव आयोजित किया। इसमें शिक्षाविदों और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बच्चों में ऐसे संकेतों को पहचानने और सुरक्षित माहौल बनाने पर चर्चा की।
इस कार्यक्रम में कोलकाता के कई प्रतिष्ठित स्कूलों के प्रिंसिपलों और शिक्षाविदों ने भाग लिया, जिनमें ला मार्टिनियर फॉर गर्ल्स, बिड़ला हाई स्कूल (मुकुंदपुर), द न्यूटाउन स्कूल, श्री शिक्षायतन स्कूल और यूरोकिड्स जैसे संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल थे। ECA की राष्ट्रीय कोर कमेटी सदस्य डॉ. सुमन सूद भी मौजूद थीं।
मुख्य पैनल चर्चा “अवेयरनेस टू एक्शन: हाउ स्कूल्स कैन रिकॉग्नाइज, रिस्पॉन्ड टू एंड प्रिवेंट बुलिंग” में शुरुआती पहचान, संवेदनशीलता और सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार पर जोर दिया गया।
कोलकाता के एक अध्ययन के अनुसार 10.5% छात्र साइबर बुलिंग का शिकार हुए हैं, जबकि एनसीईआरटी (NCERT) के आकलन के अनुसार पश्चिम बंगाल में 30% छात्रों ने चिढ़ाए जाने और 19% ने स्कूल में सुरक्षित न महसूस करने की बात कही है।
अनंता की संस्थापक और परामर्श मनोवैज्ञानिक माधुरी सारदा ने कहा कि बुलिंग को अनुशासन के बजाय भावनात्मक कल्याण के मुद्दे के रूप में देखा जाना चाहिए। ECA की डॉ. सुमन सूद ने कहा कि यह साझेदारी सुरक्षित और बेहतर स्कूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।