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कोलकाता सिटी

स्वास्थ्य साथी के नाम पर मरीजों के इलाज के भारी बिल का आरोप

जिलों के नर्सिंगहोम पर स्वास्थ्य भवन की नजर

मधुर, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : राज्य में आयुष्मान भारत, मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा और स्वास्थ्य साथी, तीनों स्वास्थ्य योजनाओं के बीच कुछ निजी नर्सिंगहोम पर कथित तौर पर अनियमितता करने के आरोप सामने आए हैं। स्वास्थ्य भवन की आंतरिक जांच में पूर्व बर्दवान के एक नर्सिंगहोम में स्वास्थ्य साथी योजना के तहत इलाज के नाम पर कथित तौर पर फर्जी और बढ़े हुए बिल तैयार किए जाने का आरोप है। इसके बाद स्वास्थ्य भवन ने जिलों के निजी अस्पतालों और नर्सिंगहोम की निगरानी बढ़ा दी है।

ऑपरेशन के मरीज को दिखाया स्ट्रोक का इलाज

स्वास्थ्य भवन सूत्रों के मुताबिक, स्वास्थ्य साथी योजना में ‘मेडिकल मैनेजमेंट पैकेज’ नाम की एक श्रेणी है। इस पैकेज के तहत अस्पताल में भर्ती मरीज के इलाज के खर्च की कोई निश्चित सीमा नहीं है। इसके विपरीत, सर्जरी के लिए अलग पैकेज होता है, जिसमें खर्च की सीमा निर्धारित रहती है। आरोप है कि पूर्व बर्दवान के एक नर्सिंगहोम में सर्जरी की जरूरत वाले मरीजों को मेडिकल मैनेजमेंट पैकेज में भर्ती दिखाकर कथित तौर पर अधिक रकम के बिल बनाए गए थे। सूत्रों के अनुसार, ऑर्थोपेडिक सर्जरी का खर्च करीब 30 से 45 हजार रुपये के बीच होता है, वहीं कुछ मामलों में ब्रेन स्ट्रोक के इलाज के नाम पर 90 हजार रुपये तक का बिल दिखाया गया। जांच में ऐसे 14 मामले पाए गए हैं।

दूसरे मरीज की रिपोर्ट का इस्तेमाल करने का आरोप

आरोप है कि जिन बीमारियों का इलाज स्वास्थ्य साथी योजना के तहत उपलब्ध नहीं है, ऐसे मरीजों को कथित तौर पर योजना में शामिल बीमारी से पीड़ित बताकर भर्ती किया गया था। स्वास्थ्य भवन के एक अधिकारी ने बताया कि, कुछ मामलों में ऑर्थोपेडिक मरीज को ब्रेन स्ट्रोक का मरीज दिखाने के लिए पुराने स्ट्रोक मरीज की सीटी स्कैन रिपोर्ट का कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया था। आरोप है कि रिपोर्ट में सिर्फ मरीज का नाम और तारीख बदलकर उसका इस्तेमाल नए मरीज के इलाज के दस्तावेज के रूप में किया गया था। स्वास्थ्य भवन अब ऐसे संस्थानों के रिकॉर्ड और स्वास्थ्य साथी के तहत किए गए दावों की जांच पर जोर दे रहा है। विशेषकर इलाज, बीमारी, पैकेज और बिलिंग के बीच अंतर की पड़ताल की जा सकती है।

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