कोलकाता : पश्चिम बंगाल विधानसभा में बुधवार को परिसीमन के मुद्दे पर चर्चा के दौरान ममता बनर्जी खेमे के विधायकों को बोलने का अवसर नहीं मिलने को लेकर विवाद खड़ा हो गया। वरिष्ठ तृणमूल विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने चर्चा की शुरुआत में हालीशहर में ममता बनर्जी के साथ कथित दुर्व्यवहार का मुद्दा उठाने की कोशिश की, लेकिन सदन में हंगामा शुरू हो गया। इस दौरान भाजपा विधायकों की ओर से भी उनका विरोध किया गया।
बाद में पत्रकारों से बातचीत में शोभनदेव ने आरोप लगाया कि हालीशहर दौरे के दौरान ममता बनर्जी पर ईंट-पत्थर, जूते, कीचड़ और पानी की बोतलें फेंकी गयीं। उन्होंने कहा कि वह घटना के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग विधानसभा में उठाना चाहते थे, लेकिन उन्हें अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया गया।
परिसीमन विधेयक पर भी शोभनदेव ने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि विधेयक पारित होने के बाद 15 दिनों तक लोगों से राय लेने का प्रावधान है, तो विधेयक पारित होने के बाद इस प्रक्रिया का क्या औचित्य रह जाता है।
वहीं, तृणमूल विधायक कुणाल घोष को भी परिसीमन के मुद्दे पर बोलने का अवसर नहीं मिला। उन्होंने इसे लेकर विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर अपनी नाराजगी जतायी। साथ ही उन्होंने कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले की प्रति भी अध्यक्ष को सौंपी।
कुणाल घोष ने दावा किया कि अदालत के फैसले में सदन के भीतर अपनी शिकायत रखने के उनके अधिकार को मान्यता दी गयी है। इस घटनाक्रम के बाद विधानसभा में परिसीमन को लेकर राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है।