टाइटन और भारती एयरटेल  PTI
कोलकाता सिटी

25 साल, 5 सुर... और एक अमर पहचान...

एयरटेल की सिग्नेचर ट्यून की कहानी

सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : ब्रांडिंग की दुनिया में बहुत कम ऐसे उदाहरण मिलते हैं, जहां केवल कुछ सेकंड की धुन किसी कंपनी की इतनी मजबूत पहचान बन जाए कि उसे सुनते ही लोगों के मन में उसी ब्रांड का नाम आ जाए। एयरटेल की पांच सुरों वाली सिग्नेचर ट्यून ऐसा ही एक दुर्लभ उदाहरण है। वर्ष 2026 में यह प्रतिष्ठित धुन अपने 25 वर्ष पूरे कर रही है और आज भी उतनी ही प्रासंगिक है, जितनी इसके लॉन्च के समय थी।

साल 2001 में जब भारत में मोबाइल क्रांति की शुरुआत हो रही थी, तब एयरटेल ने अपने लिए ऐसी पहचान बनाने का निर्णय लिया जो भाषा, क्षेत्र और संस्कृति की सीमाओं से परे हो। इस जिम्मेदारी को प्रसिद्ध संगीतकार ए. आर. रहमान ने निभाया। उन्होंने पारंपरिक जिंगल या गीत के बजाय केवल पांच सुरों की एक छोटी, मधुर और भावनात्मक धुन तैयार की। इसमें न शब्द थे, न कोई चेहरा और न ही किसी विशेष विज्ञापन का संदेश। यही इसकी सबसे बड़ी ताकत बनी।

कुछ ही वर्षों में यह धुन एयरटेल के हर ग्राहक अनुभव का हिस्सा बन गई। कॉलर ट्यून, ग्राहक सेवा, टीवी विज्ञापन, एयरटेल स्टोर और विभिन्न प्रचार अभियानों में यही संगीत सुनाई देने लगा। करोड़ों भारतीयों के लिए मोबाइल फोन के शुरुआती अनुभवों के साथ यह धुन जुड़ गई और धीरे-धीरे यह केवल एक विज्ञापन संगीत नहीं, बल्कि भारत की मोबाइल संस्कृति का हिस्सा बन गई।

समय के साथ एयरटेल ने इस धुन के कई नए संस्करण भी प्रस्तुत किए। वर्ष 2013 में इसे बुडापेस्ट सिम्फनी ऑर्केस्ट्रा के साथ नए रूप में रिकॉर्ड किया गया। 2017 में दक्षिण भारतीय श्रोताओं के लिए इसका कर्नाटक संगीत आधारित संस्करण तैयार हुआ। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक, कोरल और लोक संगीत की शैली में भी इसे प्रस्तुत किया गया, लेकिन मूल पांच सुरों की पहचान कभी नहीं बदली।

टेलीकॉम क्षेत्र में योजनाएं, कीमतें, तकनीक और नेटवर्क लगातार बदलते रहते हैं। 2जी से 3जी, 4जी और अब 5जी तक का सफर तय करने के बावजूद एयरटेल की यह धुन हमेशा ब्रांड की स्थायी पहचान बनी रही। यही कारण है कि इसे भारत में "सोनिक ब्रांडिंग" के सबसे सफल उदाहरणों में गिना जाता है।

आज जब ब्रांड अपनी पहचान के लिए लोगो, रंग और डिजाइन के साथ-साथ ध्वनि पर भी विशेष ध्यान दे रहे हैं, तब एयरटेल की यह पांच सुरों वाली धुन यह साबित करती है कि प्रभावशाली ब्रांडिंग केवल विज्ञापन नहीं होती, बल्कि लोगों की यादों और भावनाओं का हिस्सा बन जाती है। 25 वर्षों बाद भी यह धुन सुनते ही लोगों के मन में सबसे पहले एयरटेल का नाम आता है। यही किसी भी ब्रांड की सबसे बड़ी सफलता मानी जाती है।

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