कोलकाता/जलपाईगुड़ी : बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (VTR) में करीब नौ दिनों की कोशिश के बाद वन विभाग की टीम ने तीन वर्षीय बाघिन को सफलतापूर्वक पकड़ लिया।
बारिश के कारण अभियान में लगातार बाधाएं आ रही थीं, लेकिन मंगलवार शाम मौसम अनुकूल होने के बाद वनकर्मियों को बाघिन को ट्रैंक्विलाइज करने में सफलता मिली। बाघिन को पश्चिम बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व में बाघ पुनर्वास परियोजना के तहत लाया जा रहा है।
रेडियो कॉलर लगाया गया, पूरी तरह स्वस्थ बताई गई बाघिन
बंगाल के वन मंत्री मनोज कुमार ओरांव ने बताया कि करीब तीन साल की बाघिन पूरी तरह स्वस्थ है और उसे रेडियो कॉलर भी लगाया जा चुका है। मंगलवार शाम करीब 5.30 बजे उसे सुरक्षित तरीके से पकड़ा गया। इस बाघिन को पहले चुने गए 12 बाघों में से शॉर्टलिस्ट किया गया था और बाद में परियोजना के पहले चरण के लिए तीन बाघों में शामिल किया गया।
बाघिन को पकड़ने का अभियान करीब 20 सितंबर से चल रहा था। बारिश के चलते कई बार ऑपरेशन रोकना पड़ा। सोमवार को रणनीतिक स्थानों पर भैंसों को चारे के रूप में रखा गया था। बाघिन ने एक स्थान पर शिकार किया और बाद में कई बार वहां लौटी, जिससे वनकर्मियों को उसे ट्रैंक्विलाइज करने का मौका मिला।
विमान से उत्तर बंगाल लाने की तैयारी
बाघिन को पहले सड़क मार्ग से गोरखपुर एयरबेस ले जाया जाना था। इसके बाद उसे सैन्य परिवहन विमान से हासीमारा एयरबेस पहुंचाने और वहां से पशु एंबुलेंस के जरिए बक्सा टाइगर रिजर्व ले जाने की योजना बनाई गई। इसके लिए An-32 ट्विन-इंजन सैन्य परिवहन विमान का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी सामने आई है। पूरी यात्रा में करीब पांच से छह घंटे लगने का अनुमान है।
2 अक्टूबर को बक्सा में बाघ पुनर्वास परियोजना के तहत बाघों को छोड़े जाने का कार्यक्रम प्रस्तावित है। इस मौके पर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी, केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव और राज्य के वन मंत्री मनोज कुमार ओरांव समेत कई गणमान्य लोगों के मौजूद रहने की बात कही गई है।