सन्मार्ग संवाददाता
हावड़ा : श्रीराम कथा सुनने और सत्संग में मन लगना सरल नहीं।हनुमानजी की आज्ञा के बिना कथा या सत्संग में किसी को प्रवेश नहीं हो सकता।कथा में मन लगना कठिन है।जिनके जीवन में मनोविकार कूट-कूट कर भरा होता है ,वह साधु को नहीं समझ सकता।क्योंकि उसमें पूर्व जन्मों का पाप लगा रहता है।जब व्यक्ति भजन करता है तब पाप कटता है। जिनके जीवन में पूर्व जन्मों का पुण्य लगा रहता है और उस पर ईश्वर की कृपा होती है तब उसका कथा में मन लगता है।सत्य सुनना और उसे आत्मसात करना सरल नहीं।साधु विवाद से बचता है पर कुछ सांसारिक लोग विवाद में डाल ही देते हैं।समय रहते लोग साधु और भक्त को न ही पहचान पाते हैं और न ही सम्मान देते हैं।मीराबाई,नरसी मेहता और तुलसीदास आदि जैसे भक्तों को लोगों ने क्या समय पर पहचाना ? आज उनके न रहने पर लोग आदर करते हैं।रामचरित मानस का प्रत्येक प्रसंग हृदय को छूने वाला है और जीवन को दिशा देने वाला है।
राम कथा में केवट प्रसंग बहुत ही प्रेरक है।केवट पूर्व जन्म कछुआ था ।जब वह क्षीरसागर में शयन करते विष्णु का दर्शन करना चाहता था तो उसे लक्ष्मी(सीता) और शेषनाग(लक्ष्मण) भगा देते थे। समय बदला आज वही कछुआ गंगा तट पर केवट बना।वनवास यात्रा में प्रभु राम ,सीता और लक्ष्मण के संग गंगापार के लिए तट पर पहुंचे।राम बड़े प्रेम से कहते हैं,भाई केवट मुझे गंगा पार उतार दो।
केवट कहता है,यही हमारा काम है।पर एक शर्त है जब तक आप अपने पैरों को मुझे पखारने के लिए आज्ञा नहीं देंगे तब तक पार नहीं उतार सकता।मैं आपका मर्म जानता हूं,सुना है , आपके पैरों की धूल में कुछ जादू हैं,अगर मेरी नाव स्त्री बन गई तो मेरी जीविका का क्या होगा? केवट के इस अटपटे व प्रेम भरी बोली को सुनकर रामजी बोले,जो करना है सो जल्दी कर भाई, मुझे गंगा पार उतार दो।आज्ञा पाकर केवट खिल उठा।काठ का परौता लाया और प्रभुराम का चरण पखारने लगा।
प्रभुराम का चरणामृत सभी को पिलाया,कहा अब आप नाव चढ़ सकते हैं।रामजी ने पहले सीता,लक्ष्मण नाव पर चढ़ाकर अंत में स्वयं चढ़े।उतरने पर रामजी केवट को उतराई देने लगे तो केवट ने साफ मना कर दिया,कहा आज जीवन भर की मजदूरी आपके दर्शन मात्र से मिल गई।जगत में सबसे गरीब वही है जिसमें राम प्रेम न हो।जिस साधक ने रामजी के स्वभाव को जान लिया वह केवल उनका ही भजन करता है। ब्रह्मलीन संत रामसुखदास महाराज कहते थे, राम-सुख चाहते हो तो भजन करो और रामचरितमानस का पाठ करो।
ये बातें रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष में सुन्दरकाण्ड भक्त मण्डल,कोलकाता के तत्वावधान में श्रीराम कथा पर प्रवचन करते हुए परम पूज्य संत मुरलीधर महाराज ने हनुमंतधाम (फोरशोर रोड,शिवपुर)में कही।
कार्यक्रम का संचालन भागवत मर्मज्ञ हरीश तिवाड़ी ने किया। श्रीरामकथा को सफल बनाने में
आयोजन समिति के संरक्षक श्याम सुन्दर अग्रवाल,मुख्य यजमान आशाराम झंवर व संदीप गुप्ता ,दैनिक यजमान श्याम सुन्दर तोषनीवाल,ओम प्रकाश दरक,गजानंद दायमा, संस्था के अध्यक्ष पवन कुमार ताम्बी,सचिव शिवशंकर लाहोटी,आयोजन समिति के अध्यक्ष श्याम सुन्दर तोषनीवाल,सचिव ललित कुमार सिंघी सहित अन्य सदस्य सक्रिय है।इस अवसर पर नंदलाल रूंगटा, सज्जन सराफ, सुशील ओझा,अशोक झुनझुनवाला, प्रवीण अग्रवाल, प्रदीप ढेडिया, पुरुषोत्तम तिवारी, महावीर प्रसाद रावत सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।