प्रसेनजीत, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल में लगभग 60 लाख मतदाताओं के भविष्य को लेकर चुनाव आयोग को पत्र लिखकर गंभीर आरोप और मांगें रखीं। उन्होंने बताया कि आयोग की नीतियां द्वैध हैं। एक तरफ मतदाताओं के नामों का जल्दी निपटारा करने की बात कही जा रही है, वहीं वास्तविक प्रक्रिया अत्यंत धीमी गति से चल रही है।
अभिषेक ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार अंतिम और अतिरिक्त मतदाता सूची तुरंत प्रकाशित करने का आग्रह किया। पत्र में उन्होंने जोर दिया कि जिन मतदाताओं के नाम ‘विचाराधीन’ हैं, उनका लोकतांत्रिक अधिकार सुरक्षित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति में आयोग सामान्य जनता को अंधकार में रखकर निर्णय ले रहा है।
अभिषेक ने पत्र में कहा कि 28 फरवरी को जारी अंतिम मतदाता सूची में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार प्रतिदिन अतिरिक्त सूची में नाम जोड़ने और सार्वजनिक करने का नियम पालन नहीं किया गया। ज्यूडिशियल अधिकारियों के लिए बनाया गया पोर्टल भी पूरी तरह पारदर्शी नहीं है, जिससे मतदाताओं में चिंता बढ़ रही है। उन्होंने यह भी कहा कि जिनके नाम निचली सूची में हैं, उन्हें कारण लिखित रूप में बताया जाना चाहिए ताकि वे कानूनी चुनौती दे सकें।
समाधान के लिए ओड़िशा और झारखंड से 200 अतिरिक्त ज्यूडिशियल अधिकारी लाए जा रहे हैं। मुख्य रूप से मुरशिदाबाद, उत्तर–दक्षिण 24 परगना, पूर्व बर्धमान, हावड़ा, हुगली, बीरभूम और नदीया जिलों के मतदाता मामलों पर ध्यान दिया जाएगा। अभिषेक ने स्पष्ट किया कि 60 लाख विचाराधीन मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए तृणमूल लगातार कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई करेगी। अभिषेक ने स्पष्ट किया कि 60 लाख विचाराधीन मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए तृणमूल लगातार कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई करेगी।