सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : एंटीबायोटिक और एंटी-माइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) की बढ़ती चुनौती से निपटने के लिए राज्य सरकार अब ‘स्टेट एंटीबायोटिक एक्शन प्लान’ लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। इस संबंध में 9 जनवरी को स्वास्थ्य विभाग की पहल पर एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें राज्यस्तरीय एक्शन प्लान के मसौदे को अंतिम रूप दिया जा सकता है। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के साथ पशुपालन, मत्स्य और पर्यावरण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित होंगे। सभी विभागों को एक साझा मंच पर लाकर ‘वन हेल्थ’ मॉडल के तहत समन्वित योजना तैयार की जा रही है। उदाहरण के तौर पर, जिन इलाकों में मच्छरों का प्रकोप अधिक है, वहां गप्पी मछली के पालन को बढ़ावा देकर मच्छर नियंत्रण पर जोर दिया जाएगा। इसके साथ ही पशुपालन और वन विभाग को भी इस योजना से जोड़े जाने की संभावना है। गौरतलब है कि बीते एक वर्ष से राज्य सरकार एंटीबायोटिक और एंटी-माइक्रोबियल रेजिस्टेंस को नियंत्रित करने के लिए सक्रिय है। इस दौरान यह चिह्नित किया गया है कि किन एंटीबायोटिक दवाओं का बिना जरूरत और अनियंत्रित उपयोग आम लोगों के लिए खतरनाक साबित हो रहा है।
नई नीति के तहत अस्पतालों के इंडोर, आउटडोर और आईसीयू में किन परिस्थितियों में कौन-सी एंटीबायोटिक दवा दी जा सकती है, इस पर स्पष्ट और सख्त गाइडलाइन तय की जाएगी। साथ ही यह भी उल्लेख रहेगा कि किन मामलों में एंटीबायोटिक के इस्तेमाल पर नियंत्रण जरूरी है। उल्लेखनीय है कि हाल ही में केंद्र सरकार ने भी दवाओं के दुरुपयोग पर सख्त रुख अपनाते हुए 156 बाजार-चलित ‘कॉकटेल दवाओं’ पर प्रतिबंध लगा दिया है। गुणवत्ता परीक्षण में विफल रहने और मरीजों के लिए संभावित रूप से खतरनाक पाए जाने के बाद मोदी सरकार ने इन दवाओं को गुरुवार से प्रतिबंधित कर दिया है। केंद्र के अनुसार, ये दवाएं डोज कॉम्बिनेशन या कॉकटेल मेडिसिन की श्रेणी में आती हैं, जिनमें एक ही दवा में कई दवाओं का मिश्रण होता है। विशेषज्ञ समिति की जांच में सामने आया कि ये दवाएं मरीजों के लिए नुकसानदेह हो सकती हैं। आरोप है कि कई दवा कंपनियां बिना पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण के ऐसी दवाएं बना रही थीं।