कोलकाता: शहर की करीब 96 साल पुरानी मोहम्मद अली लाइब्रेरी ने लंबे इंतजार के बाद फिर से नया रूप हासिल कर लिया है।
कभी जर्जर होती किताबों, खराब हो चुके रैक और बदहाल ढांचे के बीच अपनी पहचान बचाने की जद्दोजहद कर रही यह ऐतिहासिक लाइब्रेरी अब तीन साल चले व्यापक मरम्मत और संरक्षण कार्य के बाद दोबारा लोगों के लिए तैयार है। लाइब्रेरी के पुराने स्वरूप और विरासत को बचाते हुए यहां आधुनिक सुविधाओं को भी जोड़ा गया है।
लाइब्रेरी की स्थिति पिछले कुछ वर्षों में लगातार खराब होती गई थी। कई किताबें और पुराने दस्तावेज संरक्षण के अभाव में खराब होने लगे थे, जबकि रैक और फर्नीचर भी अपनी उम्र पूरी कर चुके थे। बहाली के दौरान पुराने संग्रह और पांडुलिपियों को संभालने पर विशेष ध्यान दिया गया। खराब हिस्सों की मरम्मत के साथ लाइब्रेरी के अंदरूनी ढांचे को भी व्यवस्थित किया गया।
पुरानी विरासत को बरकरार रखते हुए नए रैक लगाए गए हैं। पढ़ने के लिए बेहतर रोशनी और बैठने की व्यवस्था की गई है, जिससे पाठकों को पहले के मुकाबले अधिक सुविधाजनक माहौल मिल सके।
लाइब्रेरी के पुनरुद्धार की प्रक्रिया करीब तीन वर्षों तक चली। इस दौरान केवल भवन की मरम्मत ही नहीं की गई, बल्कि पुराने रिकॉर्ड और पुस्तक संग्रह को भी व्यवस्थित करने का काम हुआ। लाइब्रेरी की ऐतिहासिक पहचान को बनाए रखते हुए इसे मौजूदा जरूरतों के अनुरूप तैयार किया गया है।
पुराने दस्तावेजों और रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में सुरक्षित करने की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं। इससे आने वाले समय में महत्वपूर्ण सामग्री को सुरक्षित रखने और पाठकों तक उसकी पहुंच आसान बनाने में मदद मिलेगी।
पुनरुद्धार के बाद मोहम्मद अली लाइब्रेरी को सिर्फ पुराने पुस्तक संग्रह के संरक्षण तक सीमित रखने के बजाय इसे फिर से एक सक्रिय अध्ययन और सामुदायिक केंद्र के रूप में विकसित करने की कोशिश की गई है। बेहतर प्रकाश व्यवस्था, नए रैक और सुधरी हुई बैठने की सुविधा से पाठकों के लिए माहौल बदला है।
लाइब्रेरी से जुड़े लोगों का मानना है कि इस पुनर्जीवन से शहर की पुरानी बौद्धिक और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने में मदद मिलेगी। तीन साल के इंतजार के बाद ऐतिहासिक लाइब्रेरी का फिर से जीवंत होना कोलकाता की विरासत को संजोने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।