कोलकाता : एक समय था जब ममता बनर्जी के आह्वान पर धर्मतला में जनसैलाब उमड़ पड़ता था। धरना मंच पर जगह बनाना मंत्रियों, सांसदों और विधायकों के लिए भी चुनौती होता था लेकिन मंगलवार को धर्मतला के वाई-चैनल में आयोजित तृणमूल कांग्रेस के धरना कार्यक्रम की तस्वीर कुछ अलग ही नजर आयी।
राज्य की सत्ता गंवाने के लगभग एक महीने बाद भाजपा सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के लिए ममता बनर्जी सड़क पर उतरीं। हालांकि राजनीतिक गलियारों में सबसे अधिक चर्चा इस बात को लेकर हुई कि पार्टी की शीर्ष नेता के मंच पर अपेक्षित संख्या में विधायक और सांसद दिखाई नहीं दिए।
दिलचस्प बात यह है कि तृणमूल कांग्रेस के पास अब भी 78 विधायक और लोकसभा-राज्यसभा मिलाकर 41 सांसद हैं। इसके बावजूद धरना मंच पर केवल कुछ चुनिंदा नेता ही मौजूद रहे। मंच पर फिरहाद हकीम, मदन मित्रा, शोभनदेव चट्टोपाध्याय, कुणाल घोष, नयना बंद्योपाध्याय और कुछ अन्य विधायक दिखाई दिए।
सांसदों में डेरेक ओ'ब्रायन, माला रॉय, समीरुल इस्लाम, दोला सेन और कल्याण बनर्जी उपस्थित थे। धरना स्थल पर भीड़ तो रही, लेकिन पहले की तुलना में उसका स्वरूप काफी अलग दिखाई दिया। कई वरिष्ठ नेताओं, पूर्व मंत्रियों और प्रभावशाली जिला नेताओं की अनुपस्थिति ने राजनीतिक चर्चा को जन्म दे दिया है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह दृश्य सत्ता से बाहर होने के बाद बदलते राजनीतिक समीकरणों और संगठनात्मक चुनौतियों की ओर संकेत करता है।