कोलकाता : लगभग एक वर्ष से लंबित सात राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को आखिरकार राज्य सरकार ने एनएचएआई और एनएचआईडीसीएल को सौंपने की मंजूरी दे दी है। मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल द्वारा जारी प्रेस नोट को केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि केंद्र-राज्य समन्वय और उत्तर बंगाल की रणनीतिक कनेक्टिविटी के लिहाज से एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, इन परियोजनाओं में एनएच-312 (जंगीपुर से बशीरहाट तक), एनएच-31 (बिहार/बंगाल सीमा से गाजोल तक), एनएच-33 (बिहार/बंगाल सीमा से फरक्का तक), नया एनएच-10 (सेवक सेना छावनी से कलिम्पोंग तक), एनएच-317ए (हासिमारा से जयगांव तक), एनएच-717 (बड़ादिघी से चांगराबंधा तक) और एनएच-110 (सिलीगुड़ी से दार्जिलिंग तक) शामिल हैं।
लंबे समय से औपचारिक हस्तांतरण नहीं होने के कारण इन मार्गों पर चौड़ीकरण, मरम्मत और नए निर्माण कार्य अटके हुए थे। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से लगातार राज्य सरकार से मंजूरी का आग्रह किया जा रहा था। अब इन परियोजनाओं को केंद्रीय एजेंसियों को सौंपे जाने से निर्माण कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है। बता दें कि उत्तर बंगाल, दार्जिलिंग और डुआर्स क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से पर्यटन, चाय उद्योग और सीमावर्ती व्यापार पर निर्भर है। बेहतर सड़क संपर्क से न केवल माल परिवहन आसान होगा, बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
रणनीतिक दृष्टि से भी यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सिक्किम, भूटान और बांग्लादेश से जुड़े मार्गों के विकास से पूर्वोत्तर क्षेत्र के साथ संपर्क और मजबूत होगा। साथ ही, सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा और व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिलने की संभावना है। अब नजर इस बात पर होगी कि जमीनी स्तर पर निर्माण कार्य कितनी तेजी से शुरू होता है।