जोड़ोबागान में मकान में का हिस्सा ढहा 
कोलकाता सिटी

जोड़ाबागान में 200 साल पुरानी जर्जर इमारत का हिस्सा ढहा, महिला की मौत, 19 लोग बचाए गए

जोड़ाबागान के ब्रज दुलाल स्ट्रीट की घटना

एनडीआरएफ और डीएमजी ने मकान में फंसे लोगों को बचाया

दीपक, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : मंगलवार को तड़के हुई मूसलाधार बारिश के बीच जोड़ाबागान इलाके में एक भीषण हादसा हो गया। जोड़ाबागान थाना क्षेत्र के 31, ब्रजदुलाल स्ट्रीट स्थित एक लगभग 200 साल पुरानी और जर्जर तीन मंजिली इमारत का एक बड़ा हिस्सा अचानक ढह गया। इस हादसे में मलबे के नीचे दबने से एक वृद्ध महिला की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि इमारत में रह रहे लगभग 19 अन्य लोग मलबे में फंस गए।

घटना की सूचना मिलते ही राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और स्थानीय पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और त्वरित बचाव अभियान चलाकर फंसे हुए लोगों को बाहर निकाला। आसपास की अन्य इमारतों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अब पूरी इमारत को ध्वस्त करने की योजना बनाई जा रही है। एहतियात के तौर पर पड़ोसियों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जा रहा है।

सुबह-सुबह हुआ हादसा

मृत महिला की पहचान उर्मिला साव (60 वर्ष से अधिक) के रूप में हुई है। मृतका के पति के अनुसार उर्मिला साव इमारत के भूतल (ग्राउंड फ्लोर) पर अपने परिवार के साथ रहती थी। मंगलवार को तड़के जब वह घर से बाहर निकल रही थी, तभी तेज धमाके जैसी आवाज के साथ इमारत का जर्जर हिस्सा सीधे उन पर आ गिरा। मलबे में दबने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। मृतका के परिजनों का आरोप हैं मकान मालिक की लापरवाही के कारण घटना घटी है।

कानूनी विवाद और मकान मालिक-किरायेदार के कलह में अटका निष्कासन

कोलकाता नगर निगम द्वारा इस ऐतिहासिक इमारत को काफी समय पहले ही ''अति-संवेदनशील एवं खतरनाक'' घोषित कर दिया गया था। लगभग छह महीने पहले भी इस इमारत के पीछे का एक बड़ा हिस्सा ढह गया था, जिसके बाद से इमारत का एक हिस्सा हवा में खतरनाक तरीके से लटका हुआ था।

नगर निगम की चेतावनियों के बावजूद इमारत खाली नहीं कराई जा सकी। इसके पीछे मुख्य कारण मकान मालिक और किरायेदारों के बीच लंबे समय से चला आ रहा कानूनी विवाद है, जो अदालत तक पहुंच चुका है। स्थानीय लोगों के अनुसार नए मकान मालिकों ने भी इमारत के एक हिस्से में रहना शुरू कर दिया था। मंगलवार को तड़के हुए हादसे के दौरान वे भी मलबे में फंस गए थे, जिन्हें बाद में स्थानीय निवासियों और बचाव दल ने बाहर निकाला।

प्रशासनिक जवाबदेही पर उठे गंभीर सवाल

उत्तरी कोलकाता का यह क्षेत्र पुरानी और जर्जर इमारतों के लिए जाना जाता है, जहां पहले भी कई बार इमारतें ढहने से जानें जा चुकी हैं। इस ताजा घटनाक्रम ने कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।. छह महीने पहले पिछला हिस्सा गिरने के बावजूद पूरी इमारत को खाली कराने के लिए कड़े कदम क्यों नहीं उठाए गए। मकान मालिक और किरायेदारों के विवाद का निपटारा समय रहते क्यों नहीं किया गया। सोमवार रात से ही जब प्लास्टर और ईंटें गिर रही थीं और शिकायत की गई थी, तब तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं की गई? कोलकाता नगर निगम के लिए अब यह सबसे बड़ी चुनौती बन गई है कि क्या केवल इमारतों पर ''खतरनाक'' का बोर्ड लगा देना ही काफी है या लोगों की जान बचाने के लिए समय रहते उन्हें खाली कराना प्राथमिकता होनी चाहिए?

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