साइबर ठगी के बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़, कोलकाता से बिहार-झारखंड तक फैला था जाल
टेलीकॉम मंत्रालय की शिकायत पर नारकेलडांगा थाना पुलिस ने की कार्रवाई
मास्टरमाइंड तौसीफ और उसका साथी मंजूर गिरफ्तार
एक नजर में पूरा खेल
200 रु. में खरीद: तौसीफ स्थानीय गरीब लोगों से 200-250 रु. में आधार कार्ड और फोटो लेता था।
2 हजार रु. में सप्लाई: फर्जी कागजातों से सिम एक्टिवेट कर तौसीफ इसे मंजूर कराकर 1,500 से 2 हजार रु. में बेचता था।
5 हजार रु. में ठगों तक बिक्री: मंजूर आगे चलकर साइबर अपराधियों और कॉल सेंटरों को 5 हजार रु. में सिम बेचता था।
अंतरराज्यीय नेटवर्क : यह गिरोह कोलकाता, बिहार, झारखंड और बंगाल के विभिन्न जिलों में फैला हुआ था।
दीपक रतन मिश्रा, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता :
केंद्रीय टेलीकॉम मंत्रालय की एक शिकायत के आधार पर कार्रवाई करते हुए नारकेलडांगा थाना पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर ठगी के लिए फर्जी सिम कार्ड मुहैया कराने वाले एक बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मामले में मुख्य आरोपी तौसीफ और उसके प्रमुख सहयोगी मोहम्मद मंजूर आलम को गिरफ्तार कर लिया है।
गरीबों की लाचारी का उठाते थे फायदा
जांच में सामने आया कि मूल रूप से बिहार के नवादा का रहने वाला तौसीफ राजाबाजार इलाके में किराए पर रहता है और वहीं दुकान चलाकर सिम कार्ड बेचने का काम करता है। पूछताछ के दौरान आरोपी ने खुलासा किया कि वह राजाबाजार क्षेत्र के गरीब और जरूरतमंद लोगों को 200 से 250 रु. का लालच देकर उनके आधार कार्ड और फोटो हासिल कर लेता था। इसके बाद वह इन दस्तावेजों का दुरुपयोग कर फर्जी तरीके से 8 से 10 सिम कार्ड सक्रिय करा लेता था। इसके बाद वह नारकेलडांगा मेन रोड के रहनेवाले मो.मंजूर आलम को बेच देता था। तौसीफ की निशानदेही पर पुलिस ने मंजूर को गिरफ्तार किया।
200 की केवाईसी से 5,000 रु. तक का खेल
फर्जी दस्तावेजों से एक्टिवेट किए गए इन सिम कार्डों को तौसीफ नारकेलडांगा निवासी मोहम्मद मंजूर आलम को 1,500 से 2,000 रुपये प्रति सिम के हिसाब से बेच देता था। इसके बाद मंजूर इन सिम कार्डों को कोलकाता, बिहार और झारखंड में सक्रिय साइबर अपराधियों और अवैध कॉल सेंटरों में काम करने वाले लड़कों को 5,000 रुपये प्रति सिम के हिसाब से सप्लाई करता था। मंजूर से पूछताछ में पता चला कि वह बीते कई सालों से झारखंड, गार्डनरिच, मटियाब्रुज, बिहार के नवादा, आसनसोल एवं सिलीगुड़ी के युवकों को फर्जी सिम कार्ड सप्लाई करता था। वह ऑर्डर आने पर तौसीफ को सिम कार्ड सप्लाई करने के लिए कहता था। पुलिस का मानना है कि मंजूर का बिहार और झारखंड के अलावा और भी कई राज्यों के साइबर ठगों के साथ संबंध था। वह तौसीफ के अलावा और भी कई दुकानदारों से फर्जी सिम कार्ड खरीदने का काम करता था।
2023 से चल रहा था फर्जी सिम का कारोबार
पुलिस के अनुसार, यह नेटवर्क साल 2023 से लगातार सक्रिय था। इस दौरान आरोपियों ने हजारों की संख्या में फर्जी सिम कार्ड तैयार कर देश भर के साइबर ठगों को बेचे, जिनका इस्तेमाल आम लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी में किया गया। हाल ही में टेलीकॉम मंत्रालय द्वारा नारकेलडांगा इलाके की एक दुकान से जारी 20 फर्जी सिम कार्डों के जरिए देशभर में साइबर ठगी की शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद जांच शुरू हुई और आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया गया। पुलिस अब इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य साइबर ठगों और कॉल सेंटरों की तलाश में जुट गई है।