रामबालक, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद 100 दिन के काम से जुड़े कर्मचारियों के बीच रोजगार को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। "काम रहेगा या नहीं?" और "वेतन मिलेगा या नहीं?" जैसे सवालों के कारण शहर के कई वार्डों में बड़ी संख्या में कर्मचारी काम पर नहीं पहुंच रहे हैं। इसका सीधा असर सफाई व्यवस्था पर पड़ा है और कई इलाकों में कूड़े का अंबार लगने लगा है। तृणमूल शासनकाल में कोलकाता नगर निगम में स्थायी नियुक्तियां कम हुई थीं। ऐसे में सफाई, तालाबों की देखरेख, पार्कों की सफाई, झाड़ियों की कटाई और स्वास्थ्य विभाग के सर्वे जैसे कई काम 100 दिन के कर्मचारियों के भरोसे चल रहे थे। राज्य सरकार की इस योजना को 'शहरी रोजगार योजना' कहा जाता है। जानकारी के अनुसार, इस योजना के तहत नियुक्त अधिकांश कर्मचारी तृणमूल समर्थक माने जाते हैं और उन्हें स्थानीय पार्षदों की सिफारिश पर काम मिला था। लेकिन 2026 विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत के बाद हालात बदल गए हैं। कई पार्षद खुद भी राजनीतिक भविष्य को लेकर असमंजस में हैं। ऐसे माहौल में कर्मचारियों की चिंता और बढ़ गई है। कर्मचारियों का कहना है कि अगर वेतन को लेकर स्पष्टता नहीं होगी तो काम करना मुश्किल है। इसी वजह से कई लोगों ने काम बंद कर दिया है। चुनाव परिणाम आने के बाद से शहर के कई इलाकों में नियमित सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई है। हालांकि, कोलकाता नगर निगम में 100 दिन के कार्य विभाग के प्रभारी मेयर परिषद सदस्य असीम कुमार बसु ने आश्वासन दिया है कि कर्मचारियों को घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी को समय पर वेतन मिलेगा और सेवाएं बाधित नहीं होंगी। उन्होंने बताया कि कोलकाता नगर निगम के मेयर फिरहाद हकीम जल्द ही नगर विकास मंत्री से मुलाकात कर इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे।