एक लड़की थी सुमन। वह बहुत गरीब थी मगर वह खुश रहती थी। एक बार सुमन की नजर एक घायल बिल्ली पर पड़ी। किसी वाहन से चोट खाकर वह घायल हो गई थी। सुमन उसे घर ले आई। उसकी मरहम-पट्टी की। पीने को गरम दूध दिया।
कई दिनों तक सुमन बिल्ली की सेवा में लगी रही। इस कारण वह अपनी सहेलियों को भी भूल जाती। इससे रीना और टीना नामक उसकी सहेलियां बिल्ली से चिढ़ने लगीं। एक दिन वे दोनों सुमन से मांगकर उसकी बिल्ली को ले गईं। सुनसान जगह पर एक गुफा में उसे धकेलकर मुंह पर पत्थर रख दिया।
कुछ दिनों बाद बड़ी डींग मारते हुए उन्होंने सुमन को बिल्ली की बात बताई। सुमन की आंखों से आंसू बहने लगे। वह तुरंत उनके साथ गुफा के पास गई। तीनों ने मिलकर पत्थर को हटाया। अंदर से बिल्ली बाहर निकली। उसकी मरने जैसी हालत हो रही थी।
सुमन के पूछने पर रीना बोली, ‘जब से यह बिल्ली मिली है, तुमने हमसे बात करना ही छोड़ दिया है। तुम इसके साथ खेलती हो, हमारे साथ नहीं। इसीलिए हमने ऐसा किया। हमें माफ कर दो।‘
सुमन ने कहा, ‘तुम्हें मेरी गलती बतानी चाहिए थी। बेचारी बिल्ली पर गुस्सा क्यों निकाला?‘ दोनों सहेलियों ने सुमन से माफी मांगी। उस दिन से वे दोनों भी बिल्ली की सहेली बन गईं।
नरेन्द्र देवांगन(उर्वशी)