रांची : झारखंड में 2024 के विधानसभा चुनाव में भाजपा जहां महज एक आदिवासी आरक्षित सीट जीत पायी थी, वहीं चंदनकियारी, छतरपुर, कांके व देवघर की एससी आरक्षित सीटों पर पार्टी के तत्कालीन विधायकों को हार का सामना करना पड़ा था। वहीं, जेकेएलएम की तरफ कुर्मी वोटरों के झुकाव ने 11 विधानसभा सीटों पर भाजपा-आजसू गठबंधन को झटका दिया।
मिशन 2029 को सामने रखकर अब भाजपा आदिवासी वोट बैंक को साथ लाने, दलित वोट बैंक को जोड़े रखने की चुनौती से निपटने में लगी है। दूसरी ओर झारखंड कांग्रेस भी तैयारी में जुट गई है। प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने 14 लोकसभा क्षेत्रों के लिए संसदीय क्षेत्र टीमें गठित की।
अंदरूनी तौर पर भाजपा ने इस दिशा में पहल शुरू कर दी है। विधानसभा चुनाव 2024 में भाजपा एससी आरक्षित नौ सीटों में चार, जबकि एसटी आरक्षित 27 सीटों में महज एक पर जीत दर्ज कर पायी थी।
भाजपा ने प्रदेश स्तर पर संगठन में बड़ा फेरबदल किया। आदिवासी समाज से आने वाले राष्ट्रीय महामंत्री गजेंद्र सिंह पटेल को झारखंड भाजपा का प्रभारी बनाया गया है। उन्होंने कोर कमेटी के नेताओं के साथ-साथ सभी पदाधिकारियों के साथ बैठक की। वहीं, आज बुधवार को भी प्रदेश में उनका दौरा होना है। इस दौरे में वह कई बैठक करेंगे।
पलामू के पूर्व सांसद ब्रजमोहन राम को भी ओडिशा का राज्यपाल बनाकर भाजपा ने दलित समाज को साधने की कोशिश की है। ब्रजमोहन राम का प्रभाव लातेहार, पलामू के साथ- साथ सीमावर्ती चतरा जिले में भी रहा है।
बता दें कि चतरा में जहां 32.65% आबादी दलितों की है, वहीं लातेहार में 21.31%और पलामू में 27.65% दलित आबादी है।
झारखंड मुक्ति मोर्चा ने लातेहार के पूर्व विधायक बैद्यनाथ राम को राज्यसभा भेजकर इस क्षेत्र में दलित वोट बैंक को पक्ष में लाने की कोशिश की थी। ऐसे में भाजपा ने भी इसी इलाके से आने वाले ब्रजमोहन राम को राज्यपाल बनाकर दलित वोटों को बिखरने से रोकने की पहल की है।