नई दिल्ली /रांची : सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के चर्चित हजारीबाग जमीन घोटाला मामले में निलंबित IAS अधिकारी विनय कुमार चौबे को सशर्त जमानत दे दी है। इसके साथ ही करीब साढ़े तेरह महीने बाद जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है।
न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद शुक्रवार को यह आदेश पारित किया। शीर्ष अदालत से राहत मिलने के बाद इस मामले में उनके जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देते हुए शर्त रखी है कि विनय चौबे बिना अनुमति देश से बाहर नहीं जाएंगे, जांच में पूरा सहयोग करेंगे और मामले के किसी भी गवाह को प्रभावित करने या उनसे संपर्क करने का प्रयास नहीं करेंगे।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन होता है, तो राज्य सरकार को जमानत निरस्त कराने के लिए सक्षम अदालत का रुख करने की स्वतंत्रता होगी। झारखंड हाईकोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद विनय चौबे ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि वह इस मामले में नवंबर 2025 से जेल में हैं और इसी मामले के सह-आरोपी विनय सिंह तथा उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह को पहले ही जमानत मिल चुकी है।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि आरोपी प्रभावशाली अधिकारी रहे हैं और रिहा होने पर गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सशर्त जमानत मंजूर कर ली। हजारीबाग जमीन घोटाला उस समय का है, जब विनय चौबे जिले के उपायुक्त थे।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की प्राथमिकी के अनुसार, वनभूमि और खासमहल जमीन के सरकारी अभिलेखों में कथित हेरफेर कर उनकी प्रकृति बदली गई और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमीन निजी व्यक्तियों के नाम हस्तांतरित की गई।
एसीबी ने इस मामले में कांड संख्या 11/2025 दर्ज की है, जिसमें विनय चौबे समेत 73 लोगों को आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी इस मामले में कथित वित्तीय लेनदेन, भूमि हस्तांतरण और सरकारी रिकॉर्ड में बदलाव की जांच कर रही है। विनय चौबे पहले से झारखंड के चर्चित शराब घोटाला मामले में भी आरोपी हैं। एसीबी ने उन्हें 20 मई 2025 को करीब छह घंटे की पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया था।
शराब घोटाले में गिरफ्तारी के 92 दिनों के भीतर आरोपपत्र दाखिल नहीं होने के कारण उन्हें हाल ही में एसीबी की विशेष अदालत से वैधानिक जमानत मिल गई थी। हालांकि, हजारीबाग जमीन घोटाला मामले में दर्ज प्राथमिकी के कारण वह जेल से रिहा नहीं हो सके।
विनय चौबे झारखंड में उत्पाद विभाग के सचिव और मुख्यमंत्री के सचिव सहित कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर कार्य कर चुके हैं। शराब घोटाला और हजारीबाग जमीन घोटाला, दोनों मामलों की जांच फिलहाल एसीबी की ओर से जारी है।