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झारखंड

झारखंड में 60 लाख क्विंटल के लक्ष्य के साथ सोमवार से धान की खरीद शुरू होगी

वर्ष 2025-26 में धान की फसल के लिए केंद्र द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के अलावा 81 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस मिलेगा।

Badrinath Shaw

रांची: झारखंड सरकार ने लगभग 60 लाख क्विंटल धान की खरीद का लक्ष्य रखा है और यह प्रक्रिया 15 दिसंबर से शुरू होगी। एक अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए राज्य भर में कुल 783 क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं।

2,450 रुपये प्रति क्विंटल से होगी धान की खरीद

राज्य के खाद्य, सार्वजनिक वितरण और उपभोक्ता मामलों के मंत्री ने अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों, सांसदों और विधायकों से अपने-अपने क्षेत्रों में स्थित क्रय केंद्रों का दौरा करने और इस पहल की शुरुआत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों से धान 2,450 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदेगी।

81 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस

राज्य के ई-उपार्जन पोर्टल के अनुसार, अधिकारियों ने लगभग 60 लाख क्विंटल धान की खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया है। झारखंड मंत्रिमंडल ने आठ दिसंबर को फैसला किया था कि राज्य के किसानों को वित्त वर्ष 2025-26 में धान की फसल के लिए केंद्र द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के अलावा 81 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस मिलेगा। राज्य मंत्रिपरिषद ने किसानों से धान की खरीद के बदले बोनस के रूप में 48.60 करोड़ रुपये की राशि को भी मंजूरी दी।

MSP और बोनस मिलकर 2,450 रुपये प्रति क्विंटल

अधिकारी ने बताया कि एमएसपी और बोनस मिलाकर 2,450 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। उन्होंने कहा कि किसानों को सरकार द्वारा खरीदी जाने वाली धान की राशि का एकमुश्त भुगतान मिलेगा, न कि पहले की तरह किश्तों में भुगतान किया जाएगा। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने हालांकि सरकार पर धान की खरीद में देरी करने और किसानों को अपनी उपज न्यूनतम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया।

बाबूलाल मरांडी का आरोप

विपक्ष के नेता और भाजपा की झारखंड इकाई के अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने बृहस्पतिवार को समाप्त हुए शीतकालीन सत्र के दौरान आरोप लगाया था, ‘‘सरकारी खरीद की प्रक्रिया अब तक तक शुरू नहीं हुई है, इसलिए किसानों को अपना धान खुले बाजार में मात्र 1,500 रुपये और 1,600 रुपये प्रति क्विंटल के मामूली भाव पर बेचना पड़ रहा है।’’

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