झारखंड हाईकोर्ट 
झारखंड

जेपीएससी नियुक्ति पर झारखंड हाईकोर्ट की फटकार

अदालत ने जेपीएससी की नियुक्ति प्रक्रिया समयबद्ध करने और सरकार से स्पष्ट जवाब तलब किया

Santosh Sharma

रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया दो माह के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया है। अदालत ने सरकार को इस संबंध में 18 नवंबर तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।

मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने राज्य के वन विभाग में अधिकारियों एवं कर्मचारियों की कमी के मामले में स्वत: संज्ञान के आधार पर दर्ज जनहित याचिका पर गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता रोहित राय और अधिवक्ता विभोर मयंक ने अदालत को बताया कि जेपीएससी के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया दो माह के भीतर पूरी कर लिए जाने की संभावना है। सरकार के इस बयान के बाद खंडपीठ ने नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने के लिए दो माह का समय दिया और 18 नवंबर तक अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।

मामले की अगली सुनवाई के लिए अदालत ने 19 नवंबर की तारीख निर्धारित की है। इससे पहले हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जेपीएससी में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी करने के लिए स्पष्ट समय-सीमा बताने को कहा था। वन विभाग में अधिकारियों और कर्मियों की कमी से संबंधित इस मामले की सुनवाई के दौरान जेपीएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल भी अदालत के समक्ष उपस्थित हुए। उन्होंने खंडपीठ को बताया कि असिस्टेंट कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट और रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर के पदों के लिए आयोजित परीक्षा प्रक्रिया रद्द कर दी गई है।

अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान संबंधित पक्षों से आवश्यक जानकारी ली और जेपीएससी में शीर्ष पदों तथा सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा किए जाने पर जोर दिया। जेपीएससी राज्य में विभिन्न सरकारी सेवाओं में नियुक्ति के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं का आयोजन करता है।

आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों के पद महत्वपूर्ण होने के कारण इन पदों पर नियुक्ति का सीधा संबंध आयोग के कामकाज और भर्ती प्रक्रिया से है। अदालत द्वारा 18 नवंबर तक अनुपालन रिपोर्ट मांगे जाने के बाद अब सरकार को निर्धारित अवधि में नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर उसकी स्थिति से न्यायालय को अवगत कराना होगा।

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