रांची : झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्र मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने की अपनी मांग पर रविवार को अड़े रहे, जबकि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने उन्हें न्याय का भरोसा दिलाया।
राज्य सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच रविवार को आयोजित छठे दौर की बातचीत भी बेनतीजा रही। अधिकारियों के JSSC-CGL परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच सीबीआई से कराने की मांग को छोड़कर प्रदर्शनकारियों की 98 फीसदी मांगें मान लेने का दावा करने के बावजूद दोनों पक्षों के बीच गतिरोध दूर नहीं हो सका।
छात्र नेता रवींद्र पासवान ने राज्य सरकार के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत के बाद कहा, हमारी ज्यादातर मांगें मान ली गई हैं, जिनमें 14वीं जेपीएससी परीक्षा को रद्द किया जाना भी शामिल है। हालांकि, जब तक CBI जांच की हमारी मांग पूरी नहीं हो जाती, हम कोई समझौता नहीं करेंगे। हम 10 अगस्त को तय योजना के तहत झारखंड विधानसभा की ओर मार्च करेंगे।
झारखंड के तकनीकी एवं उच्च शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि सरकार ने 98 फीसदी मांगें मान ली हैं, लेकिन वह JSSC-CGL परीक्षा की CBI जांच की मांग को मानने की स्थिति में नहीं है, क्योंकि यह परीक्षा उच्च न्यायालय और शीर्ष अदालत की निगरानी में आयोजित की गई थी।
कुमार प्रदर्शनकारी छात्रों से बात करने वाले सरकारी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा, हमारी छात्रों के साथ सकारात्मक बातचीत हुई; राज्य सरकार झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षा में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जांच कराने की सिफारिश करेगी। अब उन्हें तय करना है कि आंदोलन वापस लेना है या नहीं।
कुमार ने परीक्षा में गड़बड़ी से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए त्वरित अदालत की स्थापना की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि ऐसे मामले में आरोपपत्र 90 दिन के भीतर दाखिल किया जाएगा।
कुमार ने कहा, परीक्षा में सुधार से जुड़े सुझाव देने के लिए IIT-ISM धनबाद, IIM रांची और XLRI जमशेदपुर के विशेषज्ञों को लेकर एक समिति भी बनाई जाएगी।
उन्होंने बताया कि सरकार ने JSSC-CGL परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने की भी सहमति जता दी है।