हाथी 
झारखंड

सारंडा जंगल में IED से घायल हाथी की मौत, एक साल में 6 हाथियों की हुई मौत

वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश

चाईबासा : झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल में नक्सलियों द्वारा बिछाए गए इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस(IED) की चपेट में आकर घायल हुए हाथी की आखिरकार मौत हो गयी। पिछले 10 दिनों से वन विभाग और पशु चिकित्सकों की टीम जंगल के भीतर ही हाथी को बचाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन तमाम कोशिशें नाकाम रहीं। हाथी के शव का पोस्टमार्टम कराने की तैयारी चल रही है।

वन विभाग के अनुसार, सारंडा के सासंगदा-लेबरागढ़ा नाला के पास इस घायल हाथी का इलाज चल रहा था। चूंकि यह क्षेत्र नक्सलियों की मौजूदगी के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है, इसलिए सुरक्षा कारणों से हाथी को किसी अन्य सुरक्षित स्थान या अस्पताल ले जाना संभव नहीं हो पाया।

मनोहरपुर प्रखंड के पशु चिकित्सकों की देखरेख में उसे नियमित दवाइयां और इंजेक्शन दिए जा रहे थे। साथ ही, विभाग की ओर से उसे हर दिन एक से डेढ़ क्विंटल सब्जियां भी खिलाई जा रही थीं।

यह घटना गत 4 मई को हुई थी, जब कोयना वन प्रक्षेत्र के कोलभोंगा के पास हाथी का अगला पैर जमीन में दबे आईईडी पर पड़ने से जोरदार धमाका हुआ था। IED विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि हाथी का पैर बुरी तरह जख्मी हो गया और वह चलने में पूरी तरह असमर्थ हो गया था।

हाथी की हुई मौत के बाद स्थानीय ग्रामीणों और वन्यजीव प्रेमियों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि सुरक्षा बलों के लिए बिछाए गए ये जाल अब बेजुबान जानवरों के लिए काल बन रहे हैं। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। साथ ही इस तरह की हरकतों पर लगाम लगाई जाए।

बता दें कि सारंडा के जंगलों में हाथियों के IED विस्फोट की चपेट में आने की यह कोई पहली घटना नहीं है। पिछले साल 12 अक्टूबर को एक हथिनी की भी IED विस्फोट में घायल होने के बाद मौत हो गई थी। वहीं, जुलाई 2025 में लगभग 6 वर्षीय के हाथी ‘गडरू’ ने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। वह 24 जून 2025 को विस्फोट में घायल हुआ था। उसे बचाने के लिए गुजरात की संस्था ‘वनतारा’ की मेडिकल टीम ने भी प्रयास किए थे।

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