झारखंड JSSC-CGL प्रोटेस्ट पर लेखक अंशुमन भगत ने कहा- “आश्वासन नहीं, मजबूत सिस्टम चाहिए” 
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झारखंड JSSC-CGL प्रोटेस्ट - आश्वासन नहीं, मजबूत सिस्टम चाहिए : अंशुमन

रांची की सड़कों पर न्याय और पारदर्शिता की मांग कर रहे अभ्यर्थियों के समर्थन में अंशुमन भगत ने दिल्ली के छात्र विरोध से तुलना करते हुए सिस्टम की सोच पर सवाल उठाए

Goutam Ojha

रांची : झारखंड में JSSC-CGL और अन्य भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है, जहां राजधानी रांची में अभ्यर्थी सड़कों पर उतरकर पारदर्शिता और न्याय की मांग कर रहे हैं। कई दौर की बातचीत के बावजूद अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है, जिससे युवाओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम पर लेखक अंशुमन भगत ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आज झारखंड की स्थिति कुछ वैसी ही नजर आ रही है, जैसी कुछ दिन पहले दिल्ली में छात्रों के विरोध के दौरान देखने को मिली थी, जहां मुद्दे अलग थे लेकिन सिस्टम की सोच एक जैसी थी।

सिस्टम की खामियों को उजागर करती है समस्या

भगत का कहना है कि यह समस्या सिर्फ एक परीक्षा या एक भर्ती प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम की खामियों को उजागर करती है और ये कोई पहली बार नहीं है। उन्होंने कहा, “पेपर लीक कोई एक मुद्दा नहीं है, यह पूरे सिस्टम की कमजोरी का संकेत है। सिर्फ स्मार्ट एजुकेशन सिस्टम की बात करने से कुछ नहीं होगा, अब समय है स्मार्ट पॉलिटिकल सिस्टम की भी मांग करने का। हर बार गलती होने के बाद दोषी को हटा देना समाधान नहीं है, यह उसी तरह है जैसे बार-बार गलती करो और बाद में जिम्मेदार व्यक्ति को बदल दो। असली बदलाव तब होगा जब ऐसा सिस्टम तैयार किया जाए, जिसमें गलती होने की गुंजाइश ही खत्म हो जाए।”

छात्रों को मिल रहा केवल आश्वासन

वर्तमान में छात्रों को न्याय और पारदर्शिता के नाम पर केवल आश्वासन दिया जा रहा है और “भरोसे” के नाम पर एक तरह से लॉलीपॉप देकर मामला शांत करने की कोशिश की जा रही है, जिससे युवाओं का भरोसा कमजोर हो रहा है। लेखक ने मीडिया की भूमिका पर भी जोर देते हुए कहा कि इस मुद्दे को सिर्फ एक प्रदर्शन के रूप में नहीं, बल्कि सिस्टम की गंभीर विफलता के रूप में दिखाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल झारखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर के उन युवाओं की आवाज है जो मेहनत के बावजूद सिस्टम की खामियों के कारण बार-बार निराश होते हैं, इसलिए अब समय आ गया है कि आश्वासन से आगे बढ़कर एक मजबूत और पारदर्शी व्यवस्था बनाई जाए।

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