बोकारो : बोकारो स्टील प्लांट के प्रशिक्षित प्रशिक्षुओं के एक समूह ने अपना आंदोलन जारी रखते हुए शनिवार को कारखाने के सभी 11 द्वार बंद कर दिए, जिससे उत्पादन प्रभावित हो गया।
दशकों पहले बोकारो स्टील लिमिटेड (बीएसएल) संयंत्र की स्थापना के दौरान विस्थापित हुए परिवारों से ताल्लुक रखने वाले प्रदर्शनकारी अपनी नौकरियों को नियमित करने की मांग कर रहे हैं। शनिवार को उनका मौजूदा आंदोलन आठवें दिन भी जारी रहा।
बीएसएल के प्रवक्ता मणिकांत धन ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने शनिवार सुबह से स्टील प्लांट के सभी 11 द्वार बंद कर दिए, जिससे कर्मचारियों के लिए कारखाने में प्रवेश करना या बाहर निकलना असंभव हो गया।
अधिकारी ने उत्पादन में हुए नुकसान का ब्योरा दिए बिना कहा, सुबह हमें उन कर्मचारियों के साथ काम जारी रखना पड़ा, जो रात की पाली में ड्यूटी पर होने के कारण प्लांट के अंदर ही थे। सभी द्वार बंद होने से कोई भी कर्मचारी न तो अंदर जा सका और न ही बाहर आ सका। इससे उत्पादन और अन्य आधिकारिक कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संगठन विस्थापित नौजवान संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष अरुण कुमार महतो ने कहा कि उन्होंने गुरुवार को कुछ द्वार बंद करके अधिकारियों को चेतावनी दी थी कि मांगें पूरी नहीं होने पर वे सभी द्वार बंद कर देंगे।
उन्होंने कहा कि वे भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड (सेल) की इकाई से स्थायी नौकरी और भर्ती की स्पष्ट नीति बनाने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।
विस्थापित नौजवान संघर्ष मोर्चा के बैनर तले 106 लोग बीएसएल प्लांट के पास प्रदर्शन कर रहे हैं। बोकारो से कांग्रेस विधायक श्वेता सिंह, धनबाद से भाजपा सांसद ढुलू महतो और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) विधायक जयराम महतो ने भी आंदोलन को समर्थन दिया है।