मेदिनीनगर : झारखंड के पलामू जिले के एक विशेष संवेदनशील जनजातीय समूह (PVTG) के 19 वर्षीय युवक को करीब दस वर्ष बाद पश्चिम बंगाल से खोजकर उसके परिजनों से मिलाया गया। अधिकारियों ने बताया कि छतरपुर पुलिस थाना क्षेत्र के कला गांव का निवासी मंदीस परहैया मात्र 9 वर्ष का था जब वह अपने माता-पिता से बिछड़ गया था।
दस साल बाद पुलिस ने उसे पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में खोज निकाला और 22 फरवरी को वह अपने घर लौटा। पलामू की पुलिस अधीक्षक रीश्मा रमेशन ने बताया कि युवक के पिता मंगल परहैया के बयान के आधार पर पिछले साल 18 दिसंबर को औपचारिक गुमशुदगी की प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
एसपी ने कहा, जब हमने उनसे पूछा कि इतने वर्षों बाद औपचारिक शिकायत क्यों दर्ज करा रहे हैं, तो उन्होंने बताया कि करीब 10 वर्ष पहले उनके दो पड़ोसी उनके बेटे को काम की तलाश में कोलकाता ले गए थे और फिर उन्होंने उन्हें बेटे से मिलने नहीं दिया।
इस आदिवासी परिवार ने अपने बेटे से मिलने के कई प्रयास किए लेकिन नाकाम रहे। एसपी ने बताया कि एक बार पड़ोसी मंगल और उनकी पत्नी को बेटे से मिलाने के लिए प.बंगाल ले गए, लेकिन वे उससे मिल नहीं सके।
परिवार की स्थिति को देखते हुए मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया। रमेशन ने कहा, मैंने टीम को मामले की गहन जांच के निर्देश दिए और उनके बेटे को वापस लाने को कहा।
छतरपुर के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) अवध कुमार यादव ने बताया कि दो संदिग्ध पड़ोसियों से पूछताछ के बाद सफलता मिली। उन्होंने दावा किया कि मंदीस पहले कोलकाता में था, लेकिन बाद में कहीं और चला गया।
अंततः उसे कोलकाता-बांग्लादेश सीमा के निकट दक्षिण 24 परगना जिले में खोज लिया गया। SDPO ने कहा, तकनीकी निगरानी और स्थानीय पुलिस की मदद से हमने मंदीस का पता लगाया।
एक दशक बीत जाने के बाद युवक को केवल अपने गांव और माता-पिता के नाम याद थे। कुमार ने कहा, इन्हीं जानकारियों के आधार पर पुलिस ने उसकी पहचान की और 22 फरवरी को उसे वापस लाया गया।
दस वर्षों की अनिश्चितता के बाद मंगल परहैया और उनका परिवार मंदीस को जीवित और सकुशल देखकर भावुक हो उठा।