रांची के राज हॉस्पिटल में इलाज के नाम पर 22 लाख लिए 
झारखंड

टूटी हड्डी पर 22 लाख का बिल, युवक की मौत के बाद हेमंत सोरेन के आदेश पर अस्पताल की जांच शुरू

सरकारी अस्पताल में साधारण फ्रैक्चर के इलाज पर 22 लाख का बिल, मरीज की मौत के बाद परिजनों का हंगामा, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जांच के आदेश दिए

झारखंड की राजधानी रांची के मेन रोड स्थित राज हॉस्पिटल एक बार फिर बड़े विवादों में घिर गया है। पलामू के रहने वाले 18 साल के युवक राजू कुमार रंजन की इलाज के दौरान हुई मौत और उसके बाद परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों ने सबको चौंका दिया है। परिवार का आरोप है कि एक मामूली सड़क हादसे में पैर की हड्डी टूटने के बाद युवक को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के नाम पर उनसे 22 लाख रुपये वसूल लिए गए, लेकिन इसके बावजूद युवक की जान नहीं बचाई जा सकी। अब इस मामले पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कड़ा रुख अपनाया है, जिसके बाद उनके निर्देशों पर जिला प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।

हादसे से लेकर मौत तक की कहानी: डराकर पैसे वसूलने और लापरवाही का आरोप पीड़ित परिवार के अनुसार, लातेहार के रहने वाले राजू कुमार रंजन के साथ 24 मई 2026 को एक सड़क दुर्घटना हुई थी। पैर की हड्डी टूटने के बाद उसे इलाज के लिए रांची के राज हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। शुरुआती दिनों में राजू की हालत बिल्कुल ठीक और नियंत्रण में थी, लेकिन आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने परिवार को आईसीयू (ICU) का डर दिखाना शुरू कर दिया और मोटी रकम की मांग करने लगे।

बच्चे की जान बचाने के लिए मजबूर परिजनों ने कर्ज लिया और अपने गहने तक बेचकर अस्पताल का खर्च जुटाया। लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी 2 जुलाई 2026 को राजू ने दम तोड़ दिया। परिवार का सीधा आरोप है कि अस्पताल ने इलाज में भारी लापरवाही की और उन्हें मरीज की असली हालत के बारे में हमेशा अंधेरे में रखा।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर बड़ा एक्शन:

इस दुखद घटना ने तब तूल पकड़ लिया जब पीड़ित परिवार ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में घोर लापरवाही और आर्थिक शोषण (मोटी रकम वसूलने) के सीधे आरोप लगाए। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री से मिले कड़े निर्देशों के बाद, शनिवार को परियोजना पदाधिकारी मनीषा तिर्की की अगुवाई में एक उच्च स्तरीय प्रशासनिक टीम जांच के लिए सीधे राज हॉस्पिटल पहुंची।

अस्पताल प्रबंधन ने साधी चुप्पी, रिकॉर्ड खंगालने में जुटी प्रशासनिक टीम

इस बेहद संवेदनशील मामले पर राज हॉस्पिटल प्रबंधन ने फिलहाल पूरी तरह चुप्पी साध ली है और कोई भी बयान देने से बच रहा है। दूसरी ओर, मौके पर पहुंची प्रशासनिक टीम ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। टीम मरीज की भर्ती से लेकर डिस्चार्ज तक के सभी दस्तावेजों, मेडिकल रिकॉर्ड और बिलिंग से जुड़े कागजातों की बारीकी से जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी और रिपोर्ट के आधार पर जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इधर, जवान बेटा खो चुका पीड़ित परिवार अब सिर्फ और सिर्फ न्याय की गुहार लगा रहा है।

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