देश/विदेश

सुरक्षा में चूक और पक्षपात का आरोप, राज्यपाल से मिले त्रिपुरा के विधायक

KD Parth

टिपरा मोथा के रंजीत देबबर्मा ने एसपी अमिताभ पॉल के खिलाफ कार्रवाई की मांग की

अगरतला :

त्रिपुरा में टिपरा मोथा पार्टी के विधायक रंजीत देबबर्मा ने पुलिस अधीक्षक (सुरक्षा) अमिताभ पॉल पर सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही, पक्षपात, भेदभाव और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए राज्यपाल इंद्रसेना रेड्डी नल्लू से हस्तक्षेप की मांग की है। विधायक ने 27 अक्टूबर को राज्यपाल को पत्र लिखकर अधिकारी के खिलाफ उचित कार्रवाई करने का आग्रह किया। हालांकि, पत्र में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारी का पक्ष सामने नहीं आया है। 24-रामचंद्रघाट विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले देबबर्मा ने दावा किया कि उन्हें कई दिनों तक निजी सुरक्षा अधिकारी (पीएसओ) के बिना रहना पड़ा। उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र को दूरदराज का पहाड़ी इलाका बताते हुए सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई और कहा कि इससे उनकी निजी सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।

बिना सूचना पीएसओ हटाने का आरोप

राज्यपाल को लिखे दो पन्नों के पत्र के अनुसार, 10 अक्टूबर को उनके पीएसओ सुकेश देबबर्मा को बिना पूर्व सूचना के हटा दिया गया था। विधायक का आरोप है कि उन्होंने 13 अक्टूबर को इस संबंध में शिकायत दर्ज कराकर निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की, लेकिन एसपी (सुरक्षा) कार्यालय की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। देबबर्मा के मुताबिक, विरोधस्वरूप उन्होंने 23 अक्टूबर को दोपहर तीन बजे अपने शेष दो पीएसओ को भी स्वेच्छा से वापस कर दिया और उन्हें एसपी (सुरक्षा) के पास रिपोर्ट करने का निर्देश दिया। उन्होंने दावा किया कि इसके बाद से वह बिना सुरक्षा कवर के हैं। विधायक ने पीएसओ के बार-बार तबादले को मानसिक दबाव बनाने की कोशिश बताया। उन्होंने सुरक्षा विभाग में कथित पक्षपातपूर्ण कार्यप्रणाली और कुछ पुलिसकर्मियों को विशेष सुविधाएं दिए जाने पर भी सवाल उठाए।

तबादला नीति और वित्तीय अनियमितताओं पर सवाल

पत्र में देबबर्मा ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों के तबादलों के लिए कोई स्पष्ट नीति लागू नहीं है। उनका दावा है कि कुछ पुलिसकर्मी तीन साल से लेकर आठ-दस साल तक वीआईपी और वीवीआईपी की सुरक्षा में तैनात रहे हैं, जबकि अन्य कर्मियों को ऐसी सुविधाएं नहीं मिलतीं। उन्होंने इस व्यवस्था में कथित वित्तीय अनियमितताओं और भेदभाव की जांच की मांग की है। विधायक ने राज्य में अतीत में हुई राजनीतिक हिंसा की घटनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने पूर्व विधायकों परिमल साहा, मधुसूदन (भोला) साहा और गौतम दत्ता तथा पूर्व मंत्री बिमल सिन्हा के मामलों का हवाला देते हुए पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर चिंता जताई।

राज्यपाल से कार्रवाई की अपील

देबबर्मा ने राज्यपाल से एसपी अमिताभ पॉल के खिलाफ लगाए गए पक्षपात, सांप्रदायिक पूर्वाग्रह और वित्तीय भ्रष्टाचार के आरोपों पर उचित कार्रवाई करने का आग्रह किया है। आधिकारिक प्राप्ति मुहर के अनुसार, पत्र 27 अक्टूबर को अगरतला स्थित लोक भवन के राज्यपाल सचिवालय में प्राप्त हुआ। अब इस मामले में राज्यपाल सचिवालय और पुलिस प्रशासन की ओर से संभावित कार्रवाई तथा आरोपों पर संबंधित अधिकारी की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।
SCROLL FOR NEXT