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सुधा मूर्ति: अंतरिक्ष सहयोग का क्षेत्र बने, संघर्ष का नहीं

अंतरिक्ष संघर्ष का नहीं, सहयोग का क्षेत्र बना रहना चाहिए: भारत, हथियारों की होड़ रोकने के लिए बाध्यकारी वैश्विक समझौते की मांग

Muskan Lall

भारत ने कहा है कि बाहरी अंतरिक्ष संघर्ष का नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग का क्षेत्र बना रहना चाहिए। भारत ने अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ रोकने के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय समझौता करने की मांग भी दोहराई है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा की प्रथम समिति में मंगलवार को बाहरी अंतरिक्ष पर भारत का वक्तव्य देते हुए सांसद सुधा मूर्ति ने कहा कि भारत एक प्रमुख अंतरिक्ष शक्ति है और उसके अंतरिक्ष कार्यक्रम में विकास तथा सुरक्षा, दोनों आयाम शामिल हैं। उन्होंने कहा, “भारत का मानना है कि बाहरी अंतरिक्ष हम सभी का है। हम एक पृथ्वी, एक परिवार और एक भविष्य में विश्वास करते हैं। हमारा विचार है कि अंतरिक्ष सहयोग का क्षेत्र बना रहना चाहिए, संघर्ष का नहीं।”

मूर्ति ने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र में नए देशों और अन्य पक्षों की भागीदारी बढ़ रही है। ऐसे में दोहरे उपयोग वाली अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियां और परिसंपत्तियां वास्तविकता बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ रोकने के तरीकों और इस दिशा में किस दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, इस पर अब भी मतभेद हैं।

भारत ने अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ की रोकथाम (पीएआरओएस) के लिए एक ऐसे कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौते की वकालत की, जिसे सभी देश स्वीकार कर सकें, जिसका सत्यापन संभव हो और जिस पर निरस्त्रीकरण सम्मेलन में बहुपक्षीय बातचीत के जरिए सहमति बने। मूर्ति ने कहा कि भारत सार्वभौमिक और गैर-भेदभावपूर्ण गैर-बाध्यकारी मानदंडों, पारदर्शिता तथा विश्वास-निर्माण के उपायों के लिए भी तैयार है। हालांकि, ये उपाय कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौते के पूरक हो सकते हैं, उसका विकल्प नहीं।

उन्होंने कहा कि बाहरी अंतरिक्ष की सुरक्षा, संरक्षा और स्थिरता से जुड़े खतरे, गलतफहमी और गलत आकलन की आशंका तथा अंतरिक्ष में बल प्रयोग की सीमा जैसे मुद्दों पर एक साथ विचार किया जाना चाहिए। मूर्ति के अनुसार, कुछ चुनिंदा खतरों पर ही ध्यान केंद्रित करना प्रतिकूल साबित हो सकता है। अंतरिक्ष में देशों के व्यवहार का सत्यापन करना और इसके लिए जरूरी सूचनाओं तथा आंकड़ों तक पहुंच सुनिश्चित करना भी बड़ी चुनौती है। उन्होंने अंतरिक्ष सुरक्षा, संरक्षा और स्थिरता पर काम करने वाले विभिन्न मंचों के अधिकार-क्षेत्र का सम्मान करने और एक ही मुद्दे पर कई मानक बनाने से बचने की जरूरत पर जोर दिया।

मूर्ति ने कहा कि विकासशील देश होने के नाते भारत चाहता है कि इस प्रक्रिया के किसी भी नतीजे से शांतिपूर्ण और वैध उद्देश्यों के लिए वैज्ञानिक एवं तकनीकी अनुसंधान के आदान-प्रदान को हतोत्साहित नहीं किया जाए। उन्होंने भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं का भी उल्लेख किया। भारत ने 2023 में चंद्रमा पर अंतरिक्ष यान उतारा था और अब अपने मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम ‘गगनयान’ की तैयारी कर रहा है। इसके अलावा, भारत की योजना ‘भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन’ नाम से अपना राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने की भी है।

सुधा मूर्ति संयुक्त राष्ट्र के परिचयात्मक दौरे पर पहुंचे भारतीय सांसदों के दूसरे समूह का हिस्सा हैं। इस दौरे के दौरान सांसदों की संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में अधिकारियों, वरिष्ठ संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों, राजनयिक प्रतिनिधियों और भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों से मुलाकात निर्धारित है।

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