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शिलांग पीक रोपवे परियोजना पर विवाद तेज

KD Parth

पॉल लिंगदोह ने मंजूरियों का दिया हवाला

शिलांग :

मेघालय में प्रस्तावित शिलांग पीक रोपवे परियोजना को लेकर पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन विकास के बीच विवाद गहरा गया है। राज्य के पूर्व पर्यटन मंत्री और वेस्ट शिलांग के विधायक पॉल लिंगदोह ने परियोजना का बचाव करते हुए कहा है कि इसके लिए पर्यावरण संबंधी आवश्यक मंजूरियां 2022 में ही प्राप्त कर ली गई थीं। हालांकि, संयुक्त कार्रवाई समिति (जेएसी) ने परियोजना के मौजूदा स्थल पर निर्माण का विरोध जारी रखने और इसे दूसरी जगह स्थानांतरित करने की मांग दोहराई है। लिंगदोह की यह प्रतिक्रिया पर्यटन विभाग और प्रदर्शनकारी समिति के बीच हुई बातचीत के बेनतीजा रहने के बाद सामने आई है। समिति का कहना है कि लुम शिलांग क्षेत्र में प्रस्तावित रोपवे निर्माण के कारण पेड़ों की कटाई, जलस्रोतों और आसपास के पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। इसी आधार पर वह परियोजना को मौजूदा स्थान से हटाने की मांग कर रही है।

2022 में मंजूरियां मिलने का दावा

पॉल लिंगदोह ने कहा कि परियोजना के लिए पर्यावरण संबंधी मंजूरियों की प्रक्रिया 2022 में शुरू हुई थी और आवश्यक अनुमतियां प्राप्त की गई थीं। उनके अनुसार, इसके बाद केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से भी संबंधित मंजूरियां ली गईं। उन्होंने दावा किया कि संबंधित स्थानीय पारंपरिक संस्थाओं और क्षेत्रीय विधायक की ओर से पहले परियोजना पर आपत्ति नहीं जताई गई थी। लिंगदोह ने सवाल उठाया कि यदि परियोजना को लेकर गंभीर आपत्तियां थीं, तो उन्हें 2023, 2024 या 2025 में क्यों नहीं उठाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि परियोजना से जुड़े दस्तावेजों और मंजूरियों का अध्ययन करने के बाद ही इस संबंध में निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए। हालांकि, मंजूरियों को लेकर उनके दावों और स्थानीय निवासियों की आपत्तियों के बीच विवाद अभी समाप्त नहीं हुआ है।

पेड़ों की कटाई और जलस्रोतों को लेकर चिंता

संयुक्त कार्रवाई समिति का मुख्य विरोध परियोजना के प्रस्तावित स्थल को लेकर है। समिति चाहती है कि रोपवे को लुम शिलांग से हटाकर किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर बनाया जाए। उसका कहना है कि क्षेत्र में पेड़ों की कटाई से प्राकृतिक पर्यावरण, जल उपलब्धता, औषधीय पौधों और वन्यजीवों पर असर पड़ सकता है। समिति से जुड़ी डॉ. लिंडा मारबानियांग ने स्थानीय लोगों की चिंताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि शिलांग और आसपास के इलाकों में जलस्रोतों का संरक्षण प्राथमिकता होनी चाहिए। उनके अनुसार, निवासियों को परियोजना के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई और निर्माण स्थल पर पेड़ों की कटाई शुरू होने के बाद ही कई लोगों को इसके बारे में पता चला। समिति ने यह सवाल भी उठाया है कि यदि पेड़ों की कटाई की भरपाई दूसरे स्थान पर पौधरोपण से की जाती है, तो क्या इससे परियोजना स्थल के स्थानीय पर्यावरण और जलस्रोतों को होने वाली संभावित क्षति की भरपाई हो सकेगी।

सरकार और स्थानीय लोगों के बीच संवाद की कमी

लिंगदोह ने परियोजना के बचाव के साथ-साथ यह भी स्वीकार किया कि सरकार और स्थानीय लोगों के बीच संवाद की कमी से विरोध बढ़ा है। उन्होंने कहा कि परियोजना से जुड़े अधिकारियों को लोगों की आशंकाओं का जवाब देने और मंजूरियों से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करने के लिए आगे आना चाहिए। इस बीच, पर्यटन विभाग और संयुक्त कार्रवाई समिति के बीच हुई बैठक में कोई सहमति नहीं बन सकी। पर्यटन विभाग की निदेशक ब्रेंडा पाकिंटियेन ने बताया कि बैठक के बाद विभाग सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगा। बैठक की अध्यक्षता आयुक्त एवं सचिव आर.एम. कुर्बाह ने की थी।

17 अक्टूबर को प्रदर्शन का ऐलान

समिति ने परियोजना के विरोध में 17 अक्टूबर को सुबह 10 बजे लाबान लास्ट स्टॉप से सेरीकल्चर फार्म स्थित प्रस्तावित निर्माण स्थल तक शांतिपूर्ण रैली निकालने की घोषणा की है। समिति ने स्थानीय निवासियों से इसमें भाग लेने की अपील की है। फिलहाल परियोजना को लेकर दोनों पक्षों के रुख में अंतर बना हुआ है। लिंगदोह पर्यावरण संबंधी मंजूरियों और निर्धारित प्रक्रियाओं का हवाला देकर परियोजना का समर्थन कर रहे हैं, जबकि प्रदर्शनकारी स्थल परिवर्तन की मांग पर कायम हैं। विवाद के समाधान के लिए पर्यावरणीय प्रभाव, जलस्रोतों की सुरक्षा और स्थानीय लोगों की चिंताओं पर स्पष्ट जानकारी तथा संवाद महत्वपूर्ण होंगे।
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