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भारत की सहायता से नेपाल में पुनर्निर्मित बौद्ध मठ को यूनेस्को ने किया पुरस्कृत

पुनर्निर्मित 17वीं सदी के एक बौद्ध मठ को संयुक्त राष्ट्र की विरासत संरक्षण एजेंसी यूनेस्को ने पुरस्कृत किया

काठमांडू : नेपाल में 2015 में आए भूकंप में क्षतिग्रस्त और भारत की मदद से पुनर्निर्मित 17वीं सदी के एक बौद्ध मठ को संयुक्त राष्ट्र की विरासत संरक्षण एजेंसी यूनेस्को ने पुरस्कृत किया है। काठमांडू के बाहरी इलाके ललितपुर स्थित जेष्ठ वर्ण महाविहार को बृहस्पतिवार को एक समारोह में संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) की ओर से पुरस्कार दिया गया। नेपाल में यूनेस्को के प्रतिनिधि जैको डु टोइट ने ललितपुर में आयोजित समारोह में 2025 यूनेस्को एशिया-प्रशांत सांस्कृतिक विरासत संरक्षण पुरस्कार के तहत धातु की एक पट्टिका और आधिकारिक प्रमाणपत्र जेष्ठ वर्ण महाविहार उपयोगकर्ता समिति को सौंपा।

काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने एक बयान में कहा कि 2015 के भूकंप के बाद भारत सरकार द्वारा दी गई सहायता के तहत 13.78 करोड़ नेपाली रुपये की लागत से जेष्ठ वर्ण महाविहार का पुनर्निर्माण किया गया। इस समारोह में भारतीय दूतावास के उप मिशन प्रमुख राकेश पांडेय और नेपाल के कई अन्य गणमान्य लोग मौजूद थे। राकेश पांडेय ने उपयोगकर्ता समिति और इस परियोजना से जुड़े सभी लोगों को बधाई दी।

उन्होंने कहा कि जेष्ठ वर्ण महाविहार परियोजना की सफलता भारत और नेपाल के बीच गहरे सांस्कृतिक व ऐतिहासिक संबंधों को दर्शाती है।

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