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मेघालय में सड़क किनारे बने दुर्गा पूजा पंडाल हटाने की मांग

KD Parth

शिलांग :

मेघालय में दुर्गा पूजा के दौरान सार्वजनिक सड़कों के किनारे बनाए गए पंडालों को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। खासी छात्र संघ (केएसयू) ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) से सड़क किनारे बने ऐसे अस्थायी ढांचों को हटाने और यातायात नियमों को सख्ती से लागू करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि इन पंडालों के कारण वाहनों और पैदल यात्रियों की आवाजाही प्रभावित हो रही है तथा लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता को लिखे पत्र में केएसयू ने कहा कि सार्वजनिक सड़कों के किनारे अस्थायी निर्माण से संबंधित नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। संगठन के अनुसार, इस संबंध में स्थानीय लोगों और अन्य संबंधित पक्षों से शिकायतें मिली हैं। खासकर उन स्थानों पर समस्या अधिक गंभीर है, जहां सड़क पहले से ही संकरी है। केएसयू ने विभाग से यातायात में बाधा पैदा करने वाले अस्थायी ढांचों के खिलाफ कार्रवाई करने और भविष्य में ऐसी स्थिति रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने का आग्रह किया। संगठन ने जोर दिया कि सार्वजनिक सड़कों पर वाहनों और पैदल यात्रियों की सुरक्षित आवाजाही से समझौता नहीं किया जाना चाहिए।इससे पहले पूर्वी खासी हिल्स के हाइनीवट्रेप नेशनल यूथ फ्रंट (एचएनवाईएफ) ने भी शिलांग में दुर्गा पूजा पंडालों के कारण यातायात बाधित होने की आशंका जताई थी। संगठन के अध्यक्ष स्टीवसन रेमंड ख्रिएम ने 29 सितंबर को पूर्वी खासी हिल्स के उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर प्रमुख सड़कों और सार्वजनिक मार्गों पर बनाए जा रहे पंडालों से उत्पन्न होने वाली समस्याओं की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया था।एचएनवाईएफ ने आरआर कॉलोनी-रिनजाह, लाबान, पोलो, रिलबोंग और गरिखाना-उमशिरपी मार्ग सहित कई इलाकों का उल्लेख करते हुए कहा था कि सड़क किनारे अस्थायी ढांचे खड़े होने से वाहनों की आवाजाही सीमित हो सकती है और जाम की स्थिति पैदा हो सकती है।संगठन ने स्पष्ट किया था कि उसे दुर्गा पूजा समारोहों से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन त्योहार के आयोजन के लिए व्यस्त सार्वजनिक सड़कों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए, यदि इससे यात्रियों, पैदल चलने वालों और स्थानीय निवासियों को परेशानी होती है। एचएनवाईएफ ने जिला प्रशासन से पूरे त्योहार के दौरान प्रमुख मार्गों को सुगम और यातायात के लिए खुला रखने की मांग की थी।केएसयू की ताजा अपील के बाद अब यह देखना होगा कि पीडब्ल्यूडी और जिला प्रशासन सड़क किनारे बने पूजा पंडालों को लेकर क्या कदम उठाते हैं।
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