आइजोल : मिजोरम ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यटन को जोड़ने की दिशा में एक नई पहल के तहत बुधवार को अपना पहला ‘प्लक एंड पे’ फेस्टिवल शुरू किया। खावजॉल जिले के तुआलते और चावंगलताई गांवों में आयोजित तीन दिवसीय महोत्सव 25 सितंबर तक चलेगा। इसका उद्देश्य पर्यटकों को सीधे खेतों और स्थानीय समुदायों से जोड़ना तथा पर्यटन से होने वाली आय का लाभ ग्रामीण परिवारों तक पहुंचाना है। इस पहल के तहत पर्यटक स्थानीय खेतों में जाकर अपनी पसंद के फल और सब्जियां खुद तोड़ सकेंगे और जितनी उपज तोड़ेंगे, उसके लिए भुगतान करेंगे। पर्यटन विभाग के अनुसार, इससे पर्यटकों को ग्रामीण जीवन और कृषि गतिविधियों का प्रत्यक्ष अनुभव मिलेगा, वहीं किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए अतिरिक्त बाजार भी उपलब्ध होगा।
पर्यटन मंत्री ने बताया समुदाय केंद्रित पहल
मिजोरम के पर्यटन मंत्री लालंघिंगलोवा हमार ने कहा कि राज्य सरकार पर्यटन से होने वाले आर्थिक लाभ को उन समुदायों तक पहुंचाना चाहती है, जो पर्यटकों की मेजबानी करते हैं। उनके अनुसार, पर्यटन केवल पर्यटकों को किसी स्थान तक ले जाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इससे स्थानीय लोगों के लिए आर्थिक अवसर भी पैदा होने चाहिए। महोत्सव का आयोजन मिजोरम पर्यटन विभाग और खावजॉल के उपायुक्त कार्यालय ने संयुक्त रूप से किया है। इसमें केवल कृषि गतिविधियों को ही शामिल नहीं किया गया है। पारंपरिक मिजो संगीत और नृत्य, स्थानीय व्यंजन, हस्तशिल्प, सांस्कृतिक कार्यक्रम और पारंपरिक खेल भी महोत्सव का हिस्सा हैं। पर्यटकों के लिए आसपास के ऐतिहासिक एवं पर्यटन स्थलों के भ्रमण की व्यवस्था भी की गई है।
किसानों से लेकर स्थानीय कारोबार को फायदा
आयोजकों के मुताबिक, इस मॉडल से पर्यटन से जुड़े खर्च का अधिक हिस्सा स्थानीय अर्थव्यवस्था में रह सकता है। पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से स्थानीय भोजन, होमस्टे, परिवहन, गाइड सेवाओं, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मांग बढ़ने की संभावना है। यह पहल ऐसे समय शुरू हुई है जब मिजोरम ग्रामीण और समुदाय आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न जिलों में त्योहारों और स्थानीय अनुभवों को पर्यटन कैलेंडर से जोड़ रहा है। राज्य के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2025 में मिजोरम में पर्यटकों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई थी। ‘प्लक एंड पे’ फेस्टिवल के जरिए अब सरकार का जोर इस बात पर है कि बढ़ते पर्यटन का लाभ राज्य के बड़े पर्यटन केंद्रों के साथ-साथ गांवों, किसानों और स्थानीय उद्यमियों तक भी पहुंचे।