आयोग ने अभी तक नहीं की है मतदान की तारीखों की घोषणा
30 नवंबर को प्रकाशित हो सकता है अंतिम मतदाता सूची
गुवाहाटी :
असम के बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल (बीटीसी) की तीन रिक्त निर्वाचन क्षेत्रों में उपचुनाव कराने की तैयारी तेज हो गई है। राज्य निर्वाचन आयोग ने काजलगांव, दारंगाजुली और रोवता निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूचियों के संशोधन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसे आगामी उपचुनावों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, आयोग ने अभी तक मतदान की तारीखों की घोषणा नहीं की है। निर्वाचन आयोग की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार, तीनों निर्वाचन क्षेत्रों की प्रारूप मतदाता सूची 7 नवंबर 2026 को प्रकाशित की जाएगी। मतदाताओं को सूची में नाम जोड़ने, हटाने या किसी प्रविष्टि पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए 21 नवंबर तक का समय दिया गया है। प्राप्त दावों और आपत्तियों का निपटारा 27 नवंबर तक किया जाएगा। इसके बाद 30 नवंबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने का कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। मतदाता सूची का संशोधन बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल (निर्वाचन) नियम, 2004 के नियम 11 के तहत किया जाएगा। इस प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं की पहचान और सूची को अद्यतन करने पर ध्यान दिया जाएगा। आयोग ने मतदाता पात्रता निर्धारित करने के लिए 1 जनवरी 2026 को अर्हता तिथि तय की है। संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों के मतदान केंद्रों की सूची भी नियमानुसार प्रकाशित की जाएगी। इसके अतिरिक्त, निर्वाचन अधिकारियों, रिटर्निंग अधिकारियों और सहायक रिटर्निंग अधिकारियों की नियुक्ति से संबंधित सूची अधिसूचित की जा चुकी है।
तीन अलग-अलग कारणों से रिक्त हुईं सीटें
बीटीसी की इन तीन सीटों के रिक्त होने के पीछे अलग-अलग घटनाक्रम रहे हैं। काजलगांव निर्वाचन क्षेत्र के एमसीएलए पनीराम ब्रह्मा ने 2026 के असम विधानसभा चुनाव में सिडली-चिरांग विधानसभा सीट से जीत हासिल करने के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसी तरह, रोवता निर्वाचन क्षेत्र के एमसीएलए चरण बोरो ने माजबाट विधानसभा सीट से दोबारा निर्वाचित होने और राज्य मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने के बाद बीटीसी सदस्य का पद छोड़ दिया। तीसरी सीट दारंगाजुली के बीटीसी उपाध्यक्ष और भाजपा नेता बिजित ग्वरा नारजारी के निधन के बाद रिक्त हुई। अगस्त 2026 में उनके निधन के कारण इस सीट पर उपचुनाव कराना आवश्यक हो गया है।
राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना
तीनों निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया शुरू होने से स्थानीय राजनीतिक गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है। विभिन्न राजनीतिक दलों को अब अपने संभावित उम्मीदवारों, चुनावी रणनीति और क्षेत्रीय मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिलेगा। हालांकि, उपचुनाव की तारीखों की घोषणा होने तक चुनावी कार्यक्रम को अंतिम रूप नहीं दिया जा सकता। फिलहाल, मतदाता सूची का संशोधन और निर्धारित समयसीमा के भीतर दावों एवं आपत्तियों का निपटारा निर्वाचन प्रक्रिया की प्राथमिकता है। अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद उपचुनाव की तैयारियों को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।