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बाढ़ राहत सूची सार्वजनिक करने से असम सरकार का इनकार

KD Parth

बातचीत बेनतीजा

रायजोर दल के अध्यक्ष और शिवसागर के विधायक अखिल गोगोई ने लगाया आरोप

गुवाहाटी :

असम में बाढ़ प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने के मुद्दे पर राज्य सरकार और विपक्षी दल रायजोर दल के बीच बातचीत में गतिरोध पैदा हो गया है। रायजोर दल के अध्यक्ष और शिवसागर के विधायक अखिल गोगोई ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार ने बाढ़ प्रभावित करीब 57 हजार परिवारों की सूची सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि सूची को अंतिम मानकर आगे बढ़ने से कई वास्तविक प्रभावित परिवार सरकारी सहायता से वंचित रह सकते हैं। गोगोई ऊपरी असम के बाढ़ प्रभावित लोगों को मुआवजा देने की मांग को लेकर 2 अक्टूबर से विधानसभा परिसर में अनिश्चितकालीन सत्याग्रह कर रहे हैं। इस बीच राज्य सरकार के साथ उनकी बातचीत शुरू हुई थी। हालांकि, राहत पाने के पात्र परिवारों की पहचान और सूची को सार्वजनिक करने के सवाल पर सहमति नहीं बन सकी है।

57 हजार परिवारों की सूची पर विवाद

रायजोर दल के अनुसार, सरकार ने बाढ़ प्रभावित परिवारों का सर्वेक्षण कर लगभग 57 हजार परिवारों की सूची तैयार की है। गोगोई की मांग है कि इस सूची को सार्वजनिक किया जाए, ताकि प्रभावित परिवार यह पता लगा सकें कि उनका नाम इसमें शामिल है या नहीं। उन्होंने मांग की है कि सूची जारी होने के बाद सात से दस दिनों तक आपत्ति और आवेदन स्वीकार करने की व्यवस्था की जाए। जिन वास्तविक प्रभावित परिवारों के नाम सूची में शामिल नहीं हैं, उन्हें आवश्यक दस्तावेजों के साथ दावा पेश करने का अवसर मिलना चाहिए। ऐसे परिवारों के घरों और संपत्ति को हुए नुकसान का दोबारा सर्वेक्षण भी कराया जाना चाहिए। गोगोई का तर्क है कि सूची को बिना पुनर्विचार के अंतिम घोषित करने से कई पात्र परिवारों को सहायता नहीं मिल पाएगी। वहीं, गलत तरीके से कुछ अपात्र परिवारों के सूची में शामिल होने की आशंका भी बनी रह सकती है। इसलिए उन्होंने पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने और शिकायतों के निपटारे के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाने की मांग की है।

मुख्यमंत्री से बातचीत में भी नहीं बनी सहमति

रिपोर्ट के अनुसार, आपदा प्रबंधन विभाग के मंत्री केशव महंत और अखिल गोगोई के बीच फोन पर बातचीत हुई थी। इस दौरान प्रभावित परिवारों को सहायता देने से संबंधित मांगों पर चर्चा की गई। मंत्री ने इन मांगों को मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के समक्ष भी रखा। गोगोई के मुताबिक, मुख्यमंत्री के साथ भी विभिन्न मांगों पर बातचीत हुई, जिसमें कुछ प्रस्तावों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली, जबकि कुछ मांगों पर सहमति नहीं बन सकी। सबसे बड़ा विवाद इस बात को लेकर रहा कि क्या सरकार प्रभावित परिवारों की सूची सार्वजनिक करेगी और क्या छूट गए परिवारों को आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया जाएगा। रायजोर दल का आरोप है कि सरकार सूची को अंतिम मानकर केंद्र के समक्ष प्रस्तुत करना चाहती है। पार्टी का कहना है कि सूची में नाम नहीं होने के कारण किसी वास्तविक बाढ़ पीड़ित को मुआवजे से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, इस विवाद पर राज्य सरकार का विस्तृत आधिकारिक पक्ष उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं है।

मुआवजे की राशि बढ़ाने की भी मांग

अखिल गोगोई ने गंभीर रूप से प्रभावित परिवारों के लिए 10 लाख रुपये की सहायता देने की मांग की है। इसके अलावा, प्रत्येक बाढ़ प्रभावित परिवार को 15 हजार रुपये की एकमुश्त अंतरिम सहायता और शिवसागर तथा चराइदेव जिलों के प्रभावित परिवारों को अतिरिक्त 10 हजार रुपये देने की मांग भी उठाई गई है। रायजोर दल ने बाढ़ की वजहों की जांच के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग भी की है। पार्टी का कहना है कि राहत वितरण के साथ-साथ बाढ़ से हुए व्यापक नुकसान और उसके कारणों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।

सत्याग्रह जारी, आंदोलन की आगे की रणनीति पर नजर

सरकार के साथ बातचीत शुरू होने के बाद रायजोर दल और उससे जुड़े संगठनों ने अपने सड़क प्रदर्शन अस्थायी रूप से रोक दिए हैं। हालांकि, गोगोई ने अपना अनिश्चितकालीन सत्याग्रह जारी रखा है। उनका कहना है कि जब तक वास्तविक प्रभावित परिवारों को सहायता मिलने की गारंटी नहीं मिलती और सूची से छूटे लोगों के लिए उचित व्यवस्था नहीं होती, तब तक विवाद का समाधान नहीं माना जा सकता। अब निगाहें राज्य सरकार के अगले कदम पर हैं। यदि सूची सार्वजनिक करने और पुनः सर्वेक्षण की मांग पर सहमति नहीं बनती है, तो बाढ़ राहत का मुद्दा असम में राजनीतिक टकराव का विषय बना रह सकता है।
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