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नागालैंड विश्वविद्यालय के छात्रों ने प्रोफेसर मामले में न्याय की मांग की

KD Parth

जुन्हेबोटो :

नागालैंड विश्वविद्यालय के लुमामी परिसर के विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने मंगलवार को जुन्हेबोटो जिला न्यायालय परिसर में एक महिला प्रोफेसर से जुड़े मामले में शिकायतकर्ता के समर्थन में एकजुटता जताई और न्याय की मांग की। यह मामला नागालैंड विश्वविद्यालय के पूर्व प्राणीशास्त्र विभाग के प्रोफेसर डॉ. सरत चंद्र येनिसेट्टी से संबंधित है। विद्यार्थी मामले की तीसरी सुनवाई में शामिल होने के लिए अदालत परिसर पहुंचे थे। हालांकि, मंगलवार को भी सुनवाई स्थगित कर दी गई। छात्रों के अनुसार, मामले की अगली सुनवाई संभवतः 3 अक्टूबर को होगी।

2024 की घटना से जुड़ा है मामला

विश्वविद्यालय की शोधार्थी रीता छेत्री ने मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि 25 नवंबर 2024 को एक सम्मेलन और सामाजिक कार्य गतिविधि के दौरान कथित घटना हुई थी। उनके अनुसार, डॉ. सरत ने एक छात्र को बुलाकर कपड़े उतारने के लिए कहा था। शिकायतकर्ता द्वारा हस्तक्षेप किए जाने के बाद कथित तौर पर विवाद हुआ। छेत्री ने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व प्रोफेसर ने अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और बाद में विभागाध्यक्ष तथा अन्य छात्रों के हस्तक्षेप से स्थिति को नियंत्रित किया गया। उनके अनुसार, पुलिस मौके पर पहुंची और प्रोफेसर को अपने साथ ले गई। इन आरोपों की पुष्टि अदालत के अंतिम निर्णय से अभी नहीं हुई है और मामला विचाराधीन है।

बार-बार स्थगन पर छात्रों की चिंता

नागालैंड यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन लुमामी (NUSUL) की महासचिव मरियम सीएम ने कहा कि छात्र और यूनियन के पदाधिकारी विश्वविद्यालय समुदाय के एक सदस्य से जुड़े मामले में शिकायतकर्ता के समर्थन में अदालत पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि सुनवाई बार-बार स्थगित होने से छात्रों में चिंता बढ़ रही है। उनके अनुसार, घटना के कुछ प्रत्यक्षदर्शी छात्र अब विश्वविद्यालय से पढ़ाई पूरी कर चुके हैं और अपने रोजगार तथा निजी कार्यों में व्यस्त हैं। मरियम ने छात्रों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मामला लंबित रहने के दौरान संबंधित व्यक्ति के परिसर में वापस आने की स्थिति को लेकर विद्यार्थी आशंकित हैं।

90 से 100 छात्र अदालत पहुंचे

NUSUL के सहायक महासचिव अलेमवांगशी लोंगकुमेर ने कहा कि मामले की लंबी प्रक्रिया से इससे जुड़े लोगों पर मानसिक दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि छात्र चाहते हैं कि मामले का निपटारा शीघ्र हो। उन्होंने बताया कि करीब 90 से 100 विद्यार्थी मंगलवार को जिला न्यायालय परिसर में मौजूद थे। उनके अनुसार, छात्रों की शारीरिक उपस्थिति का उद्देश्य अपनी एकजुटता प्रदर्शित करना और शिकायतकर्ता के समर्थन में अपनी आवाज दर्ज कराना था। छात्रों ने अदालत परिसर में “We want justice” के नारे भी लगाए।

अगली सुनवाई में भी मौजूद रहने की बात

लोंगकुमेर ने कहा कि छात्रों ने मामले में न्याय की मांग को लेकर अपनी एकजुटता व्यक्त की है और विश्वविद्यालय प्रशासन तथा कर्मचारियों से छात्रों का समर्थन करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल छात्रों से ही नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा से भी जुड़ा है। NUSUL महासचिव मरियम ने भी कहा कि विद्यार्थी अगली सुनवाई के दौरान अदालत में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश करेंगे। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोप अभी अदालत द्वारा सिद्ध नहीं हुए हैं और अंतिम निर्णय आने तक सभी पक्षों को कानूनी प्रक्रिया के अनुसार देखा जाना है।
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