कोहिमा :
नागालैंड में जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों (डीएलएसए) ने जेलों में बंद विचाराधीन कैदियों के मामलों, स्वास्थ्य स्थिति और कानूनी सहायता की उपलब्धता की समीक्षा की। इस संबंध में 15 अक्टूबर को राज्य के विभिन्न जिलों में विचाराधीन कैदी समीक्षा समिति (यूटीआरसी) की वर्ष 2026 की चौथी त्रैमासिक बैठकें आयोजित की गईं। बैठकों में जमानत के पात्र कैदियों की पहचान, लंबित मुकदमों की स्थिति, जरूरतमंद आरोपितों को वकील उपलब्ध कराने और बीमार कैदियों के उपचार जैसे मुद्दों पर विचार किया गया। नागालैंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (एनएसएलएसए) की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, ये बैठकें राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप आयोजित की गईं। इनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जेलों में बंद विचाराधीन कैदियों को समय पर कानूनी सहायता मिले और उनके मामलों की नियमित समीक्षा हो, ताकि पात्र व्यक्तियों को उपलब्ध कानूनी राहत का लाभ मिल सके।
वोखा में चार कैदियों के लिए जमानत आवेदन की तैयारी
वोखा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की बैठक जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा प्राधिकरण की अध्यक्ष सियेलीनुओ मेझू की अध्यक्षता में हुई। बैठक में चार विचाराधीन कैदियों के लिए जमानत आवेदन दाखिल करने की सिफारिश की गई। विधिक सहायता रक्षा अधिवक्ता (एलएडीसी) को इस दिशा में आगे की कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया।इसके अलावा, तीन ऐसे विचाराधीन कैदियों की पहचान की गई, जो बीमार या शारीरिक रूप से कमजोर हैं और जिनका इलाज चल रहा है। समिति ने दो अन्य कैदियों की कानूनी सहायता की जरूरत का आकलन करने का भी निर्णय लिया।15 अक्टूबर तक वोखा जिला जेल में 27 विचाराधीन कैदी और छह दोषसिद्ध कैदी बंद थे। समीक्षा में यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया कि जमानत के पात्र कैदियों के मामलों में आवश्यक कानूनी प्रक्रिया समय पर पूरी की जाए और बीमार कैदियों को उपचार मिलता रहे।
कोहिमा में 49 विचाराधीन कैदियों के मामलों की समीक्षा
कोहिमा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की बैठक प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मेजिवोलू टी. थेरिएह की अध्यक्षता में हुई। इसमें जिला जेल में बंद 49 विचाराधीन कैदियों के मामलों की समीक्षा की गई।बैठक में एक कैदी के लिए डिफॉल्ट जमानत की सिफारिश की गई, जबकि दूसरे कैदी के जमानत आदेश में संशोधन करने की सिफारिश की गई। डिफॉल्ट जमानत का प्रावधान निर्धारित कानूनी अवधि के भीतर जांच पूरी कर आरोपपत्र दाखिल नहीं किए जाने जैसी परिस्थितियों में लागू हो सकता है, बशर्ते संबंधित कानूनी शर्तें पूरी हों।समिति ने 10 दोषसिद्ध कैदियों के मामलों की भी समीक्षा की। एक मामले में तत्काल ध्यान दिए जाने की आवश्यकता को देखते हुए कोहिमा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के स्थायी अधिवक्ता को अद्यतन स्थिति प्राप्त करने का निर्देश दिया गया। बैठक में कोहिमा और त्सेमिन्यू जिलों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
दीमापुर में 12 आरोपितों को तत्काल कानूनी सहायता
दीमापुर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की बैठक में केंद्रीय जेल और जिला जेल में बंद कैदियों के मामलों की समीक्षा की गई। बैठक की अध्यक्षता प्राधिकरण के सचिव जूलियन ने की। इसमें एलएडीसी टीम, जेल प्रशासन तथा स्थायी और पैनल अधिवक्ताओं के प्रतिनिधि शामिल हुए।समीक्षा के दौरान 12 आरोपितों को तत्काल कानूनी प्रतिनिधित्व उपलब्ध कराने के लिए विधिक सहायता रक्षा अधिवक्ताओं के पास भेजा गया। इस पहल का उद्देश्य ऐसे आरोपितों को वकील की सहायता उपलब्ध कराना है, जिन्हें अपने मामलों की पैरवी के लिए कानूनी प्रतिनिधित्व की जरूरत है।जेल में बंद किसी व्यक्ति को केवल आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण कानूनी सहायता से वंचित नहीं रहना चाहिए। ऐसे मामलों की पहचान करना और जरूरतमंदों को वकील उपलब्ध कराना विधिक सेवा संस्थाओं की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है।
अन्य जिलों में भी कैदियों के मामलों की पड़ताल
जुनहेबोटो जिला जेल में बंद सभी छह विचाराधीन कैदियों के मामलों की समीक्षा की गई। समिति ने पाया कि सभी को विधिक सहायता रक्षा अधिवक्ताओं का प्रतिनिधित्व प्राप्त था। जेल अधिकारियों ने बताया कि इनमें से कोई भी कैदी बीमार या शारीरिक रूप से कमजोर नहीं था।फेक जिले में जेल में बंद 11 विचाराधीन कैदियों के मामलों की समीक्षा की गई। सभी को कानूनी प्रतिनिधित्व उपलब्ध था, जिनमें सात कैदियों की पैरवी एलएडीसी कर रहे थे। जेल में 12 दोषसिद्ध कैदी भी बंद थे।मोकोकचुंग जिला जेल में 31 विचाराधीन कैदी और 11 दोषसिद्ध कैदी थे। समीक्षा में सभी विचाराधीन कैदियों के पास उनके संबंधित कानूनी अधिवक्ता होने की जानकारी दी गई।मोन जिले में समिति ने 54 विचाराधीन कैदियों और 11 दोषसिद्ध कैदियों सहित कुल 65 बंदियों के मामलों की समीक्षा की। तीन विचाराधीन कैदियों के लिए एलएडीसी के माध्यम से कानूनी प्रतिनिधित्व की सिफारिश की गई, जबकि एक अन्य कैदी के लिए जमानत आवेदन की सिफारिश की गई।
किफिरे, तुएनसांग और पेरेन में भी हुई समीक्षा
किफिरे जिला जेल में बंद सभी नौ विचाराधीन कैदियों के मामलों की समीक्षा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की गई। जेल में एक दोषसिद्ध कैदी भी बंद था। बैठक में किसी भी विचाराधीन कैदी को डिफॉल्ट जमानत के लिए चिह्नित नहीं किया गया।तुएनसांग जिले में 30 विचाराधीन कैदियों और चार दोषसिद्ध कैदियों की स्थिति की समीक्षा की गई। समिति ने पाया कि चार विचाराधीन कैदी कानूनी सहायता के पात्र हैं। बैठक में जिला अस्पताल स्थित विचाराधीन कैदियों के वार्ड के विस्तार के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। हालांकि, अस्पताल में फिलहाल अतिरिक्त जगह उपलब्ध नहीं होने के कारण विस्तार की योजना में बाधा सामने आई।पेरेन जिला जेल में 13 विचाराधीन कैदियों के मामलों की समीक्षा की गई। इनमें से एक कैदी के लिए जमानत आवेदन की सिफारिश की गई। एक अन्य कैदी बीमार पाया गया, जिसके बाद जेल अधिकारियों को उसकी उचित चिकित्सकीय जांच और उपचार की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया। जेल में कुल 19 बंदी थे, जिनमें छह दोषसिद्ध कैदी शामिल थे। वहां कोई महिला कैदी नहीं थी।
कानूनी अधिकारों और स्वास्थ्य सुविधाओं पर जोर
इन बैठकों से स्पष्ट होता है कि विचाराधीन कैदियों की समीक्षा केवल जमानत तक सीमित नहीं है। इसमें कानूनी प्रतिनिधित्व, मुकदमों की प्रगति, स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों और न्यायिक प्रक्रिया में होने वाली देरी जैसे मुद्दे भी शामिल हैं।विचाराधीन कैदी वे लोग हैं जिनके मामलों में न्यायालय का अंतिम फैसला नहीं आया है। उनकी स्थिति की नियमित समीक्षा करना महत्वपूर्ण है, ताकि पात्र कैदियों को कानून के अनुसार जमानत या अन्य राहत मिल सके और किसी भी व्यक्ति को अनावश्यक रूप से लंबे समय तक हिरासत में न रहना पड़े।नागालैंड में जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों की इन बैठकों का उद्देश्य कानूनी सहायता व्यवस्था को मजबूत करना और जेलों में बंद लोगों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना है। अब इन सिफारिशों का प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि संबंधित अधिवक्ता, जेल प्रशासन और अन्य अधिकारी आगे की कार्रवाई कितनी तत्परता से पूरी करते हैं।