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ग्रामीणों के विरोध पर कोक फैक्टरी बंद, जांच की मांग

KD Parth

मेघालय के राजाजू में हिम लांगरीन के लोगों ने जताया विरोध

जनसुनवाई और अनुमति प्रक्रिया पर उठाए सवाल

पर्यावरणीय प्रभावों के आकलन की मांग

शिलांग :

मेघालय के साउथ वेस्ट खासी हिल्स जिले के राजाजू गांव में ग्रामीणों के विरोध के बाद एक कोक फैक्टरी को अस्थायी रूप से बंद करा दिया गया। हिम लांगरीन के निवासियों ने आरोप लगाया कि नोंगजरी रोड के किनारे स्थापित इस फैक्टरी के संबंध में स्थानीय समुदाय को विश्वास में नहीं लिया गया और न ही सार्वजनिक सुनवाई कर लोगों की राय जानी गई। ग्रामीणों ने फैक्टरी की स्थापना और संचालन के लिए दी गई अनुमतियों पर सवाल उठाते हुए जिला प्रशासन तथा राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि औद्योगिक इकाई के संचालन से आसपास के पर्यावरण, जलस्रोतों, कृषि भूमि और लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

स्थानीय समुदाय की जानकारी के बिना फैक्टरी स्थापित करने का आरोप

जानकारी के अनुसार, 14 अक्टूबर को हिम लांगरीन के लोगों ने सेन्ग समला हिम लांगरीन के सदस्यों के साथ पोरशांगडियार क्षेत्र में स्थित कोक फैक्टरी का निरीक्षण किया। यह स्थान साउथ वेस्ट खासी हिल्स जिले के रानीकोर सिविल सब-डिवीजन के अंतर्गत राजाजू गांव के निकट है।निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि फैक्टरी स्थापित करने की अनुमति किसने दी और इसका स्वामित्व किसके पास है। उनका दावा है कि इस परियोजना के संबंध में हिम के निवासियों को पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई थी।प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि हिम लांगरीन के सिएम ने स्थानीय समुदाय को विश्वास में लिए बिना फैक्टरी के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) जारी किया और जमीन पट्टे पर देने की अनुमति दी। ग्रामीणों का कहना है कि इस प्रकार के फैसले लेने से पहले संबंधित समुदाय और पारंपरिक संस्थाओं के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया जाना चाहिए था।

जनसुनवाई नहीं होने पर जताई नाराजगी

ग्रामीणों ने फैक्टरी की स्थापना की प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इस संबंध में न तो सार्वजनिक सुनवाई आयोजित की गई और न ही डोरबार पाइलुन यानी व्यापक सामुदायिक सभा के माध्यम से लोगों की राय ली गई। उनका आरोप है कि स्थानीय लोगों को यह तय करने का अवसर नहीं मिला कि वे अपने क्षेत्र में इस तरह की औद्योगिक इकाई स्थापित करने के पक्ष में हैं या नहीं।प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि फैक्टरी जिस जमीन पर स्थापित की गई है, उसके स्वामित्व को लेकर सिएम और हिम के बीच विवाद न्यायिक विचाराधीन है। ऐसे में भूमि के इस्तेमाल और औद्योगिक गतिविधियों की अनुमति से जुड़े मामलों में पारदर्शिता जरूरी है।ग्रामीणों ने हिम लांगरीन के सिएम नोंगतेई सिएमियोंग से भी जवाबदेही की मांग की। कुछ प्रदर्शनकारियों ने उनके इस्तीफे की मांग करते हुए आरोप लगाया कि समुदाय की सहमति के बिना महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। हालांकि, ये आरोप ग्रामीणों और प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए हैं; उपलब्ध रिपोर्टों में इन पर संबंधित पक्षों का विस्तृत जवाब सामने नहीं आया है।

पर्यावरण और स्वास्थ्य पर संभावित असर की चिंता

स्थानीय निवासियों ने कोक फैक्टरी से निकलने वाले धुएं, धूल और कोयले के कणों को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यदि औद्योगिक इकाई में प्रदूषण नियंत्रण के पर्याप्त उपाय नहीं किए गए, तो आसपास की हवा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, नजदीकी जलस्रोतों और कृषि भूमि पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।ग्रामीणों ने कहा कि पर्यावरण और जनस्वास्थ्य से जुड़े जोखिमों का आकलन किए बिना फैक्टरी का संचालन जारी रखना उचित नहीं होगा। उन्होंने मांग की कि संबंधित विभाग परियोजना की अनुमति, प्रदूषण नियंत्रण संबंधी प्रावधानों और संचालन की शर्तों की जांच करें।सेन्ग समला हिम लांगरीन ने जिला प्रशासन से फैक्टरी का संचालन तत्काल रोकने और विस्तृत पर्यावरणीय आकलन पूरा होने तक इसे बंद रखने की मांग की है। संगठन ने यह भी कहा कि किसी औद्योगिक इकाई को स्थापित करने और चलाने के लिए जरूरी वैधानिक अनुमतियों की पुष्टि की जानी चाहिए।

संबंधित विभागों से जवाब नहीं मिलने का दावा

ग्रामीणों के अनुसार, उन्होंने इस मामले में पहले भी रानीकोर सिविल सब-डिवीजन के एसडीओ, वन विभाग और खासी हिल्स ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल (केएचएडीसी) के समक्ष शिकायतें और आवेदन दिए थे। उन्होंने मेघालय राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमएसपीसीबी) से भी फैक्टरी को दी गई अनुमतियों के बारे में जानकारी मांगी थी।हालांकि, प्रदर्शनकारियों का दावा है कि उन्हें अब तक संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। इसी के बाद उन्होंने फैक्टरी परिसर में पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया और उसका संचालन अस्थायी रूप से बंद करा दिया। ग्रामीणों ने प्रशासन से शिकायतों पर कार्रवाई करने तथा अनुमति प्रक्रिया से संबंधित दस्तावेजों की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

कोक फैक्टरियों की निगरानी पर फिर उठे सवाल

राजाजू की घटना ऐसे समय सामने आई है, जब मेघालय में कोक फैक्टरियों के संचालन और कोयले के स्रोतों को लेकर निगरानी बढ़ाने की जरूरत पर चर्चा हो रही है। मेघालय हाईकोर्ट की ओर से नियुक्त सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति बी.पी. कटाके की अध्यक्षता वाली समिति ने अगस्त में अपनी रिपोर्ट में राज्य के भीतर से प्राप्त कोयले के वैध स्रोतों की पुष्टि और संबंधित नियमों के अनुपालन की जांच में कमियों की ओर ध्यान दिलाया था।रिपोर्ट में कोक फैक्टरियों के लिए जरूरी अनुमतियों और आयातित कोयले से संबंधित 2024 की मानक संचालन प्रक्रिया के अनुपालन की निगरानी को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, मेघालय राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 15 कोक फैक्टरियों को स्थापना की सहमति (सीटीई) दी थी, जिनमें से 10 के पास संचालन की सहमति (सीटीओ) थी, जबकि पांच ने इसके लिए आवेदन नहीं किया था। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि जिला प्रशासन और राज्य सरकार मामले की निष्पक्ष जांच कराएंगे तथा सभी आवश्यक अनुमतियों और पर्यावरणीय मानकों की पुष्टि होने तक फैक्टरी के संचालन पर उचित निर्णय लेंगे। फिलहाल, इस मामले में स्थानीय समुदाय की सहमति, भूमि संबंधी विवाद और पर्यावरणीय सुरक्षा प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।
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