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आइजोल बाईपास प्रभावितों को 7.4 करोड़ मुआवजा वितरण शुरू

KD Parth

मिजोरम पीडब्ल्यूडी 185 भूस्वामियों को देगा अतिरिक्त मुआवजा

23 अक्टूबर तक भुगतान पूरा करने का लक्ष्य

मुआवजे में पारदर्शिता और लंबित दावों को लेकर ग्रामीणों ने उठाए थे सवाल

आइजोल :

मिजोरम लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने आइजोल बाईपास सड़क परियोजना से प्रभावित 185 भूस्वामियों को 7.4 करोड़ रुपये का अतिरिक्त मुआवजा देना शुरू कर दिया है। यह भुगतान सिहमुई से मुआलुंगथु के बीच बाईपास सड़क के निर्माण से प्रभावित भूमि मालिकों को किया जा रहा है। विभाग की परियोजना कार्यान्वयन इकाई के माध्यम से चल रही इस प्रक्रिया को 23 अक्टूबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब प्रभावित भूस्वामियों ने मुआवजे के भुगतान में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता की कमी को लेकर नाराजगी जताई थी तथा मांगें पूरी नहीं होने पर निर्माण कार्य रोकने की चेतावनी दी थी।

185 भूस्वामियों को मिलेगा अतिरिक्त मुआवजा

पीडब्ल्यूडी की ओर से शुरू किया गया 7.4 करोड़ रुपये का भुगतान बाईपास परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण से प्रभावित लोगों को अतिरिक्त मुआवजा देने की प्रक्रिया का हिस्सा है। विभाग ने मौजूदा चरण में पूरक मुआवजे के लिए कुल 13.3 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इससे पहले दिसंबर 2025 में मुआवजे की पहली किस्त वितरित की गई थी। आइजोल बाईपास परियोजना प्रधानमंत्री के पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास पहल (पीएम-डेवाइन) के तहत लागू की जा रही है। इस परियोजना का उद्देश्य आइजोल के पश्चिमी हिस्से में सिहमुई से मुआलुंगथु तक वैकल्पिक सड़क संपर्क विकसित करना है। हालांकि, भूमि अधिग्रहण, मुआवजे के भुगतान और निर्माण गतिविधियों से जुड़े मुद्दों के कारण परियोजना को लेकर प्रभावित लोगों की चिंताएं सामने आती रही हैं।

निर्माण रोकने की चेतावनी के बाद कार्रवाई

मुआवजे का वितरण ऐसे समय शुरू हुआ है, जब आइजोल बाईपास रोड वेस्टर्न साइड लैंडओनर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने अपनी मांगें पूरी नहीं होने पर 1 नवंबर से सड़क निर्माण कार्य रोकने की चेतावनी दी थी। एसोसिएशन ने अक्टूबर के अंत तक 7.4 करोड़ रुपये जारी करने और मुआवजे की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की मांग की थी। एसोसिएशन के अनुसार, सिहमुई-मुआलुंगथु खंड में भूमि अधिग्रहण से लगभग 348 लोग प्रभावित हुए हैं। संगठन ने आरोप लगाया था कि मुआवजा पाने वाले लाभार्थियों की सूची और प्रत्येक व्यक्ति को दी गई राशि का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। 6 अक्टूबर को एसोसिएशन ने इस संबंध में कथित अनियमितताओं और सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त जानकारी में विसंगतियों का मुद्दा उठाया था। संगठन का दावा था कि पीडब्ल्यूडी के आधिकारिक आंकड़ों में केवल 17 लोगों का भुगतान लंबित बताया गया, जबकि उसके अनुसार 100 से अधिक भूस्वामी अब भी मुआवजे की प्रतीक्षा कर रहे थे। ये आंकड़े एसोसिएशन के दावे हैं और भुगतान संबंधी विवाद का प्रमुख आधार बने हुए हैं।

लाभार्थियों की सूची सार्वजनिक करने की मांग

भूस्वामियों के संगठन ने सरकार और पीडब्ल्यूडी से मुआवजा प्राप्त करने वाले सभी लाभार्थियों की सूची सार्वजनिक करने की मांग की है। संगठन चाहता है कि प्रत्येक लाभार्थी को दी गई राशि का स्पष्ट विवरण उपलब्ध कराया जाए, ताकि भुगतान प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके और लंबित दावों की स्थिति स्पष्ट हो।इसके अतिरिक्त, जिन भूमि मालिकों ने नकद मुआवजे के स्थान पर भूमि निपटान प्रमाणपत्र (लैंड सेटलमेंट सर्टिफिकेट) लेने का विकल्प चुना है, उनकी जमीन का तत्काल मापन करने की मांग भी की गई है। एसोसिएशन का कहना है कि भूमि मापन और संबंधित दस्तावेजों की प्रक्रिया में देरी से प्रभावित लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

पत्थर खदान मालिकों और किसानों के नुकसान का मुद्दा

एसोसिएशन ने परियोजना से प्रभावित पत्थर खदान मालिकों के मुआवजे संबंधी दावों के निपटारे की भी मांग की है। इसके अलावा, सड़क निर्माण के दौरान खुदाई से निकली मिट्टी को निर्धारित डंपिंग स्थलों पर डालने और निर्माण गतिविधियों से प्रभावित कृषि भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।संगठन ने आरोप लगाया कि भूस्खलन या गलत स्थानों पर मिट्टी डाले जाने के कारण कुछ क्षेत्रों में फसलों और पौधारोपण को नुकसान पहुंचा है। उसने ऐसे नुकसान के लिए उचित मुआवजा देने की मांग की है। इन मुद्दों को लेकर प्रभावित भूस्वामियों का कहना है कि केवल भूमि अधिग्रहण का मुआवजा देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि निर्माण कार्य से होने वाले अन्य नुकसान का भी निष्पक्ष आकलन किया जाना चाहिए।

परियोजना के भविष्य के लिए पारदर्शिता अहम

पीडब्ल्यूडी की ओर से 7.4 करोड़ रुपये का अतिरिक्त मुआवजा वितरित करने की शुरुआत से प्रभावित भूस्वामियों की कुछ मांगों पर कार्रवाई आगे बढ़ी है। विभाग ने 23 अक्टूबर तक भुगतान पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। हालांकि, लाभार्थियों की सूची सार्वजनिक करने, लंबित भूमि मापन, पत्थर खदान मालिकों के दावों और निर्माण से फसलों एवं पौधों को हुए नुकसान के मुआवजे जैसे मुद्दे भी विवाद का हिस्सा हैं।ऐसे में परियोजना के सुचारु क्रियान्वयन के लिए मुआवजे के भुगतान की स्थिति स्पष्ट करना और प्रभावित लोगों की शिकायतों का समयबद्ध निपटारा करना महत्वपूर्ण होगा। एसोसिएशन की ओर से 1 नवंबर से निर्माण रोकने की दी गई चेतावनी के मद्देनजर आने वाले दिनों में विभाग की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
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