सुमू गोगोई, भार्गब गोगोई और जह्नु बरुआ के नाम शामिल
गुवाहाटी :
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने स्वतंत्रता दिवस 2024 से पहले असम के विभिन्न स्थानों पर इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) लगाने की कथित साजिश के मामले में तीन आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया है। शुक्रवार, 16 अक्टूबर को दाखिल इस आरोपपत्र में सुमू गोगोई, भार्गब गोगोई और जह्नु बरुआ के नाम शामिल हैं। प्रतिबंधित संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम-इंडिपेंडेंट (उल्फा-आई) के प्रमुख परेश बरुआ और ऐसेंग असम को भी इस मामले में फरार आरोपी बताया गया है। एनआईए के अनुसार, यह मामला अगस्त 2024 में असम के अलग-अलग स्थानों से 11 आईईडी बरामद होने से जुड़ा है। जांच एजेंसी का आरोप है कि इन विस्फोटक उपकरणों को स्वतंत्रता दिवस समारोह के बहिष्कार की अपील से जुड़ी व्यापक साजिश के तहत लगाया गया था। एजेंसी ने आशंका जताई कि इस साजिश का उद्देश्य लोगों की जान लेना, उन्हें घायल करना, संपत्ति को नुकसान पहुंचाना तथा भारत की एकता, अखंडता और संप्रभुता को खतरे में डालना था।
स्वतंत्रता दिवस से पहले विस्फोटों की कथित साजिश
यह मामला अगस्त 2024 में स्वतंत्रता दिवस के आसपास असम में सुरक्षा एजेंसियों की ओर से की गई जांच के दौरान सामने आया था। विभिन्न स्थानों पर संदिग्ध आईईडी मिलने के बाद राज्य में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई थी। एनआईए की जांच के अनुसार, कथित साजिश का संबंध उल्फा-आई की ओर से स्वतंत्रता दिवस समारोह का बहिष्कार करने की अपील से था। एजेंसी का आरोप है कि राज्य के कई स्थानों पर विस्फोट कर समारोहों को बाधित करने और लोगों के बीच भय पैदा करने की योजना बनाई गई थी। मामले की शुरुआत गुवाहाटी के दिसपुर पुलिस थाने में दर्ज प्राथमिकी से हुई थी। बाद में सितंबर 2024 में एनआईए ने जांच अपने हाथ में ले ली। केंद्रीय एजेंसी ने इसके बाद कथित साजिश के विभिन्न पहलुओं, आरोपियों की भूमिका और विस्फोटक उपकरणों की बरामदगी से संबंधित तथ्यों की जांच की।
तीन आरोपियों के खिलाफ नया आरोपपत्र
ताजा आरोपपत्र में सुमू गोगोई, भार्गब गोगोई और जह्नु बरुआ को शामिल किया गया है। एनआईए ने परेश बरुआ और ऐसेंग असम को भी फरार आरोपी के रूप में नामजद किया है।जांच एजेंसी के मुताबिक, सुमू गोगोई और भार्गब गोगोई ने कथित तौर पर जह्नु बरुआ को धन उपलब्ध कराया था। एजेंसी ने यह भी कहा है कि जह्नु बरुआ ने कथित रूप से बरामद 11 आईईडी में से चार को लगाने की बात स्वीकार की थी। ये सभी आरोप जांच एजेंसी के दावों पर आधारित हैं और इनका न्यायिक परीक्षण होना बाकी है।इस मामले में एनआईए पहले भी आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। जून 2025 में परेश बरुआ, अभिजीत गोगोई उर्फ ऐसेंग असम और जह्नु बरुआ के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया था। इसके बाद जनवरी 2026 में सुमू गोगोई और भार्गब गोगोई के खिलाफ पूरक आरोपपत्र दाखिल किया गया। ताजा कार्रवाई इसी मामले की आगे बढ़ी जांच का हिस्सा है।
कई कानूनों के तहत आरोप
एनआईए ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए हैं।इन कानूनी प्रावधानों के तहत कथित साजिश, विस्फोटक पदार्थों के इस्तेमाल और देश की सुरक्षा तथा संप्रभुता को खतरे में डालने से जुड़े पहलुओं की जांच की जा रही है। एनआईए का कहना है कि इस साजिश से लोगों की जान-माल को नुकसान पहुंचने और राज्य में भय का माहौल पैदा होने का खतरा था।
जांच अभी जारी
एनआईए की कार्रवाई के बावजूद मामले की जांच पूरी नहीं हुई है। एजेंसी कथित साजिश में शामिल अन्य लोगों की भूमिका और विभिन्न स्थानों पर आईईडी लगाए जाने से जुड़े पहलुओं की पड़ताल कर रही है।असम में स्वतंत्रता दिवस 2024 से पहले आईईडी मिलने का मामला राज्य की सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा है। ताजा आरोपपत्र से जांच में सामने आए आरोपों को न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण में ले जाने का रास्ता खुला है। हालांकि, आरोपपत्र दाखिल होना किसी आरोपी के दोषी साबित होने के समान नहीं है। आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर होगा।