ईरान का अनोखा मसुलेह गांव 
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ऐसा गांव जहां छतों पर चलते हैं लोग !

ईरान के गिलान प्रांत में स्थित मसुलेह एक ऐसी जगह है जहां समय जैसे ठहर सा गया है। यहां न तो वाहनों का शोर है और न ही कंक्रीट की सड़कों का जाल। यह गांव आधुनिक दुनिया के कोलाहल से दूर, पहाड़ों की गोद में अपनी एक अलग ही दुनिया बसाए हुए है।

अनोखी वास्तुकला : जहाँ छतें ही रास्ते हैं

मसुलेह की पहचान उसकी अद्भुत वास्तुकला है। यहां के घर पहाड़ी ढलान पर इस तरह से व्यवस्थित हैं कि वे एक सीढ़ीनुमा ढांचा बनाते हैं। इस बनावट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि एक घर की छत उसके ऊपर स्थित घर के लिए आंगन या चलने का रास्ता बन जाती है। यह अनोखी स्थापत्य कला यहाँ की जीवनशैली का अभिन्न अंग है-यहां पैदल ही छतों के जरिए एक मोहल्ले से दूसरे मोहल्ले तक पहुंचना एक सामान्य दिनचर्या है। बाजार, कैफे और दुकानें भी इन्हीं ऊंचे छतों वाले रास्तों पर आबाद हैं।

प्रकृति का स्वर्ग

मसुलेह का वातावरण किसी परीकथा (फेयरीटेल) के दृश्यों जैसा है। सुबह के समय जब पहाड़ों की चोटियों को घना कोहरा अपनी आगोश में ले लेता है, तो ऐसा आभास होता है मानो आप बादलों के बीच चल रहे हों । यहां की मखमली शांति और समृद्ध ईरानी परंपराएं पर्यटकों को एक ऐसा सुकून देती हैं, जो शहरों की भागदौड़ में कहीं खो गया है।

यह गांव केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि इंसान और प्रकृति के बीच के उस दुर्लभ तालमेल का प्रतीक है, जहां वास्तुकला पहाड़ की ढलानों को नुकसान नहीं, बल्कि उन्हें नया आयाम देती है।

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