अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। बुधवार को भी दोनों देशों के बीच सैन्य गतिविधियां जारी रहीं। अमेरिकी सेना ने होर्मुज स्ट्रेट के पास ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, कंट्रोल स्टेशन और निगरानी रडार ठिकानों पर हवाई हमले किए। यह कार्रवाई हाल ही में अमेरिकी AH-64 अपाचे हेलिकॉप्टर के क्रैश के बाद की गई, जिसका आरोप अमेरिका ने ईरान पर लगाया है। हालांकि ईरान ने इस आरोप को स्वीकार नहीं किया है।
अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने बहरीन में मौजूद अमेरिकी यूएस फिफ्थ फ्लीट पर ड्रोन हमले का दावा किया है। इसके अलावा ईरान ने जॉर्डन समेत क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर 21 हमले करने की बात कही है, लेकिन अमेरिका ने इन दावों को खारिज कर दिया। ईरान ने यह भी कहा कि उसकी कार्रवाई आत्मरक्षा के तहत की जा रही है और आगे भी जवाब दिया जाएगा।
इस संघर्ष का असर अब पूरे पश्चिम एशिया में दिखने लगा है। इजराइल ने लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमले किए हैं। इसके जवाब में हिजबुल्लाह ने भी इजराइली सेना पर कई हमले करने का दावा किया है। इजराइल ने चेतावनी दी है कि जरूरत पड़ने पर वह और बड़े सैन्य अभियान चलाएगा।
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक बाजार पर भी पड़ा है। होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल सप्लाई होता है, इसलिए यहां किसी भी अस्थिरता का सीधा असर कीमतों पर पड़ता है। हालिया हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में करीब 1% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सऊदी अरब और तुर्किये के विदेश मंत्रियों से बातचीत कर क्षेत्रीय हालात पर चर्चा की। वहीं डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि अमेरिका जल्द ही इस संघर्ष में “पूरी जीत” हासिल करेगा। हालांकि उनके और बेंजामिन नेतन्याहू के बीच मतभेद बढ़ने की खबरें भी सामने आ रही हैं।
मौजूदा हालात में यह संघर्ष केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें कई क्षेत्रीय ताकतें शामिल होती दिख रही हैं। हालांकि दोनों पक्षों द्वारा किए गए कई दावे अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुए हैं। ऐसे में स्थिति बेहद संवेदनशील और अनिश्चित बनी हुई है, और आने वाले दिनों में इसके और बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।