डीआर कांगो में भारतीय शांति सैनिकों को मिला संयुक्त राष्ट्र पदक
अफ्रीका के पूर्वी डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआर कांगो) में तैनात भारतीय सेना के 651 शांति सैनिकों को संयुक्त राष्ट्र पदक से सम्मानित किया गया है। यह गौरवपूर्ण सम्मान 3 जुलाई 2026 को साके स्थित स्थायी सैन्य अड्डे पर आयोजित एक विशेष समारोह के दौरान दिया गया। यह प्रतिष्ठित पदक उन जांबाज सैनिकों को प्रदान किया जाता है, जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में असाधारण और उल्लेखनीय सेवा दी हो।
वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में भारतीय बटालियन के अनुकरणीय योगदान की सराहना
इस विशेष अलंकरण समारोह की शोभा संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन 'मोनुस्को' के वरिष्ठ नेतृत्व, बल मुख्यालय के प्रतिनिधियों और उच्च सैन्य अधिकारियों ने बढ़ाई। समारोह के दौरान भारतीय सैन्य दल की ओर से दी जा रही सेवाओं की सर्वसम्मति से प्रशंसा की गई। उपस्थित अधिकारियों ने अपने संबोधन में रेखांकित किया कि भारतीय शांति सैनिकों ने विपरीत परिस्थितियों में भी अद्वितीय व्यावसायिकता का परिचय दिया है और संपूर्ण अनुशासन व कर्तव्यनिष्ठा के साथ वैश्विक शांति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पूरा किया है।
अशांति के बीच शांति की मशाल: दुनिया के सबसे मुश्किल मिशन पर भारतीय सैनिक पूर्वी डीआर कांगो को संयुक्त राष्ट्र के सबसे कठिन और खतरनाक शांति अभियानों में से एक माना जाता है। यह पूरा क्षेत्र लंबे समय से जारी हिंसा, आपसी टकराव और अस्थिरता की मार झेल रहा है। यहाँ कई सक्रिय हथियारबंद गुटों के कारण स्थानीय नागरिकों की जान हमेशा जोखिम में रहती है, जिसके चलते बड़े पैमाने पर मानवीय संकट पैदा हो गया है। ऐसे बेहद तनावपूर्ण और संकटपूर्ण माहौल में संयुक्त राष्ट्र की शांति सेना आम लोगों की सुरक्षा और शांति बहाली का जिम्मा संभालती है, और भारतीय सैनिक इसी चुनौतीपूर्ण मिशन में अपनी अग्रिम भूमिका निभा रहे हैं।
कर्तव्य पथ पर अडिग भारतीय जांबाज: कांगो में स्थानीय नागरिकों के लिए बने ढाल कांगो के अशांत माहौल में भारतीय शांति सेना ने स्थानीय नागरिकों की रक्षा के लिए एक अभेद्य ढाल के रूप में काम किया है। विपरीत और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के सामने घुटने टेकने के बजाय, भारतीय जवानों ने न केवल हिंसक झड़पों से आम जनता को महफूज रखा, बल्कि संकट के समय उन तक जीवन रक्षक मानवीय सहायता भी सुनिश्चित की। स्थानीय प्रशासन और संयुक्त राष्ट्र के तंत्र के साथ बेहतर तालमेल बिठाकर भारतीय दल ने कई संवेदनशील अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। तमाम खतरों के बाद भी भारतीय सैनिकों का हौसला अडिग रहा और वे वहाँ शांति बहाली के प्रयासों में लगातार अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे।
वीरता और उत्कृष्टता पर लगी वैश्विक मुहर
यह संयुक्त राष्ट्र पदक महज एक औपचारिक अलंकरण नहीं, बल्कि भारतीय सेना के शौर्य, बेमिसाल अनुशासन और निस्वार्थ सेवा भावना की वैश्विक संस्वीकृति है। विपरीत और जोखिम भरे वातावरण में भी भारतीय शांति सैनिकों ने जिस संयम और उच्च स्तरीय सैन्य कौशल का प्रदर्शन किया, उसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का मस्तक ऊंचा किया है। अटूट ईमानदारी के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने के उनके इसी जज्बे को आज इस पदक के माध्यम से सम्मानित किया गया है।
भारत पिछले कई दशकों से संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में एक बेहद सक्रिय और महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। दुनिया के विभिन्न अशांत और संकटग्रस्त देशों में शांति स्थापित करने के लिए भारतीय सेना के हजारों जवानों ने अपनी सेवाएं दी हैं। इन अंतरराष्ट्रीय मिशनों में भारत के योगदान को हमेशा सबसे भरोसेमंद और अनुकरणीय माना गया है। हमारे सैनिक अपनी निष्पक्षता, कड़े अनुशासन और संवेदनशील मानवीय दृष्टिकोण के लिए पूरी दुनिया में पहचाने जाते हैं। यही कारण है कि संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशनों के इतिहास में भारत की एक बेहद मजबूत और अमिट पहचान बनी हुई है।