पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने राज्य की मौजूदा सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं 
देश/विदेश

तमिलनाडु की सियासत में उबाल: स्टालिन का बड़ा दावा-“तीन महीने भी नहीं टिकेगी सरकार

कांग्रेस समर्थित विजय सरकार पर विपक्ष का हमला तेज, स्टालिन ने प्रशासनिक कमजोरियों और बढ़ते जन असंतोष का हवाला देकर गिरावट की भविष्यवाणी की

Goutam Ojha

तमिलनाडु की राजनीति इस समय तेज उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। कांग्रेस के साथ जोड़-तोड़कर सरकार बनी है। अब पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने राज्य की मौजूदा सरकार पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए दावा किया है कि यह सरकार ज्यादा समय तक नहीं टिक पाएगी। उनका कहना है कि हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि सरकार के तीन महीने पूरे करना भी मुश्किल नजर आ रहा है।

60 साल बाद सत्ता में आया तीसरा विकल्प

गौरतलब है कि हाल ही में राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला, जब अभिनेता से नेता बने सी. जोसफ विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। यह पिछले छह दशकों में पहली बार हुआ है कि द्रमुक (DMK) या अन्नाद्रमुक (AIADMK) के अलावा किसी तीसरी पार्टी ने सत्ता संभाली है। इस बदलाव को जहां कई लोग नई शुरुआत मान रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे अस्थिर प्रयोग बता रहा है।

अब चुप रहना मुश्किलः स्टालिन

चेन्नई में एक कार्यक्रम के दौरान स्टालिन ने कहा कि उन्होंने सरकार बनने के बाद छह महीने तक आलोचना न करने का फैसला किया था, लेकिन मौजूदा हालात उन्हें जल्द प्रतिक्रिया देने के लिए मजबूर कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता के बीच असंतोष तेजी से बढ़ रहा है और सरकार की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

सरकार की स्थिरता पर उठे सवाल

स्टालिन ने अपने बयान में कहा कि अब यह चर्चा नहीं रह गई है कि सरकार छह महीने चलेगी या नहीं, बल्कि असली सवाल यह है कि क्या यह तीन महीने भी पूरे कर पाएगी। उन्होंने संकेत दिया कि प्रशासनिक स्तर पर कई कमजोरियां सामने आ रही हैं, जिससे सरकार की स्थिति डगमगाती दिख रही है।

नए कार्यकर्ताओं को दी संयम की सीख

राजनीतिक हमले के बीच स्टालिन ने अपनी पार्टी में शामिल हुए नए नेताओं को अनुशासन का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी दल से आए नेताओं को अपनी पुरानी पार्टी के खिलाफ अपशब्द नहीं कहना चाहिए। उन्होंने द्रमुक संस्थापक सी.एन. अन्नादुरई का उदाहरण देते हुए कहा कि विरोधियों में भी अच्छाई देखनी चाहिए।

स्टालिन के इस बयान के बाद तमिलनाडु की राजनीति में बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। एक तरफ सरकार अपनी स्थिरता साबित करने की कोशिश करेगी, तो वहीं विपक्ष इसे मुद्दा बनाकर राजनीतिक दबाव बढ़ाने में जुटा रहेगा। आने वाले दिनों में राज्य की सियासत और अधिक गरमाने के संकेत मिल रहे हैं।

SCROLL FOR NEXT