अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन बाइडन सरकार के दौर में लागू किए गए कड़े ईंधन दक्षता नियमों में बड़ी ढील देने की तैयारी में है। नए नियमों की घोषणा सोमवार को होने की उम्मीद है। प्रस्तावित बदलावों का असर अमेरिका में बनने और बिकने वाली पेट्रोल तथा डीजल से चलने वाली कारों और हल्के ट्रकों पर पड़ेगा। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि नियमों में ढील से वाहन बनाने की लागत कम होगी और अमेरिकी परिवारों के लिए कार खरीदना आसान हो सकता है।
प्रस्तावित बदलाव का सबसे बड़ा असर वाहन कंपनियों के औसत ईंधन दक्षता लक्ष्य पर पड़ेगा। बाइडन प्रशासन के दौरान तय नियमों के तहत 2031 मॉडल वर्ष तक हल्के वाहनों की औसत ईंधन दक्षता करीब 50.4 मील प्रति गैलन तक पहुंचनी थी। ट्रंप प्रशासन के प्रस्ताव में यह लक्ष्य घटाकर करीब 34.5 मील प्रति गैलन किया जा सकता है।
ईंधन दक्षता का मतलब है कि कोई वाहन एक गैलन ईंधन में कितनी दूरी तय कर सकता है। मानक जितना ऊंचा होता है, वाहन कंपनियों को उतनी ही अधिक ईंधन-कुशल कारें तैयार करनी पड़ती हैं। ऐसे नियमों का उद्देश्य ईंधन की खपत और वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करना है।
ट्रंप लंबे समय से बाइडन दौर की वाहन नीतियों की आलोचना करते रहे हैं। उनका कहना है कि कड़े ईंधन दक्षता मानकों के कारण वाहन कंपनियों को महंगी तकनीक अपनानी पड़ती है, जिसका असर कारों की कीमत पर पड़ता है। ट्रंप प्रशासन का दावा है कि नियमों में ढील से कंपनियों को पेट्रोल से चलने वाले वाहनों के निर्माण में अधिक स्वतंत्रता मिलेगी और इससे वाहन उत्पादन को बढ़ावा मिल सकता है।
अमेरिकी परिवहन मंत्री सीन डफी ने भी प्रस्तावित बदलाव को वाहन उद्योग और अमेरिकी कामगारों के लिए महत्वपूर्ण बताया है। प्रशासन का तर्क है कि इससे ग्राहकों के पास अलग-अलग प्रकार के वाहन चुनने के अधिक विकल्प होंगे।
नियमों में बदलाव ऐसे समय हो रहा है जब अमेरिका में ईंधन की कीमतों को लेकर भी दबाव बना हुआ है। अगस्त में अमेरिका में नई कार की औसत कीमत 50,089 डॉलर तक पहुंच गई थी। वहीं सितंबर के अंत में पेट्रोल की राष्ट्रीय औसत कीमत करीब 4.47 डॉलर प्रति गैलन रही, जो एक महीने पहले 4.09 डॉलर थी।
ऐसे में कम ईंधन दक्षता वाले वाहनों की बिक्री बढ़ने पर ग्राहकों के ईंधन खर्च पर भी असर पड़ सकता है। वाहन की शुरुआती कीमत कम होने की स्थिति में भी लंबे समय तक अधिक ईंधन खपत से कुल खर्च बढ़ सकता है।
प्रस्तावित बदलावों को लेकर पर्यावरण संगठनों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि ईंधन दक्षता मानकों में ढील से पेट्रोल की खपत बढ़ सकती है और वाहनों से होने वाला प्रदूषण भी बढ़ सकता है। उनका तर्क है कि अधिक ईंधन खपत का सीधा असर उपभोक्ताओं के लंबे समय के ईंधन खर्च पर पड़ सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रीय राजमार्ग यातायात सुरक्षा प्रशासन ने पहले अनुमान लगाया था कि 2024 में लागू किए गए कड़े मानकों से 2050 तक करीब 14 अरब गैलन पेट्रोल की खपत बच सकती है। नए नियमों के लागू होने पर इस अनुमानित बचत में कमी आ सकती है।
ईंधन दक्षता नियमों में बदलाव ट्रंप प्रशासन की इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़ी पिछली नीतियों को पलटने की व्यापक कोशिश का हिस्सा है। ट्रंप प्रशासन ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने वाली कई नीतियों में बदलाव किया है। हालांकि, अमेरिका में संघीय स्तर पर ऐसा कोई कानून नहीं था जो वाहन कंपनियों को केवल इलेक्ट्रिक वाहन बेचने के लिए बाध्य करता हो।
बाइडन प्रशासन ने 2030 तक नई वाहन बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा था। यह लक्ष्य अनिवार्य बिक्री आदेश नहीं था, बल्कि इलेक्ट्रिक वाहनों के उत्पादन और इस्तेमाल को बढ़ावा देने की नीति का हिस्सा था।
अब ईंधन दक्षता नियमों में प्रस्तावित बदलाव के बाद अमेरिकी वाहन बाजार में पेट्रोल, डीजल और इलेक्ट्रिक वाहनों के बीच प्रतिस्पर्धा और कंपनियों की उत्पादन रणनीति पर इसका असर देखने को मिल सकता है।