अगरतला : त्रिपुरा के शिक्षक और लकड़ी कारोबारी आशीष सोम के करीब 15 साल पुराने लापता होने के मामले की जांच को नया सुराग मिला है। असम के श्रीभूमि जिले में तीन अज्ञात कब्रों से कंकाल मिलने के बाद अधिकारियों ने अवशेषों को फोरेंसिक जांच और डीएनए प्रोफाइलिंग के लिए सुरक्षित रखा है। अदालत के आदेश के बाद हुई इस कार्रवाई का उद्देश्य यह पता लगाना है कि बरामद अवशेषों का सोम के लापता होने के मामले से कोई संबंध है या नहीं।
अदालत के आदेश पर हुई कब्रों की जांच
बुधवार को श्रीभूमि सदर पुलिस थाने के अधिकारियों, स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों और एक मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में कब्रों की खुदाई की गई। प्रक्रिया के दौरान बरामद अवशेषों को सुरक्षित तरीके से निकालकर फोरेंसिक जांच के लिए भेजने की तैयारी की गई। त्रिपुरा से आई एक टीम ने भी इस प्रक्रिया में हिस्सा लिया। अब अवशेषों का डीएनए विश्लेषण किया जाएगा। इसके परिणामों की तुलना आशीष सोम के परिवार के संदर्भ नमूनों से की जाएगी। जांचकर्ताओं को उम्मीद है कि इससे लंबे समय से अनसुलझे मामले में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।
2011 में अगवा होने के बाद हुए थे लापता
अगरतला निवासी आशीष सोम वर्ष 2011 में त्रिपुरा के कुमारघाट इलाके से कथित तौर पर अगवा किए गए थे। उनके अपहरण के बाद परिवार से 50 लाख रुपये की फिरौती मांगे जाने की बात सामने आई थी। आरोप है कि सोम की पत्नी शैली सोम ने असम के बराईग्राम इलाके में अज्ञात लोगों को 28 लाख रुपये दिए थे। परिवार के अनुसार, फिरौती की रकम देने के बावजूद आशीष सोम वापस नहीं लौटे। इसके बाद परिजनों ने पुलिस से संपर्क किया। त्रिपुरा पुलिस ने मामले की जांच शुरू करते हुए कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद सोम का कोई पता नहीं चल सका।
2014 में भी हुई थी पहचान की कोशिश
मामले में इससे पहले वर्ष 2014 में भी एक संभावित सुराग की जांच की गई थी। श्रीभूमि के शोनबिल इलाके में एक अज्ञात पुरुष का शव मिला था। पहचान नहीं होने पर उस समय शव को तत्कालीन करीमगंज सदर कब्रिस्तान में दफना दिया गया था। बाद में अदालत के आदेश पर कब्र खोदकर शव का डीएनए परीक्षण कराया गया। हालांकि, जांच में मिली डीएनए प्रोफाइल सोम के परिवार के संदर्भ नमूनों से मेल नहीं खाई। इसके बाद भी आशीष सोम के लापता होने का रहस्य बरकरार रहा।
तीन और कब्रों से मिलने वाले अवशेषों पर नजर
हाल में अदालत ने उसी कब्रिस्तान में तीन अन्य अज्ञात कब्रों की जांच का निर्देश दिया था। इसी आदेश के तहत बुधवार को खुदाई की गई। बरामद कंकालों की वैज्ञानिक जांच अब मामले की अगली दिशा तय करेगी। अधिकारियों के सामने सबसे अहम सवाल यह है कि क्या इन अवशेषों में से किसी की पहचान आशीष सोम के रूप में हो सकती है। डीएनए रिपोर्ट आने के बाद ही इस संबंध में स्थिति स्पष्ट होगी।
परिवार को अब डीएनए रिपोर्ट का इंतजार
करीब डेढ़ दशक से आशीष सोम का परिवार उनके बारे में निश्चित जानकारी का इंतजार कर रहा है। उनकी पत्नी शैली सोम ने अब तक अपने पति के जीवित होने की उम्मीद नहीं छोड़ी है। बताया जाता है कि वह आज भी सुहाग के प्रतीक के तौर पर सिंदूर लगाती हैं। उनकी बेटी बनश्री सोम अब 29 वर्ष की हैं और वह भी अपने पिता के बारे में पुख्ता जानकारी की प्रतीक्षा कर रही हैं। ऐसे में तीन अज्ञात कब्रों से मिले अवशेषों की डीएनए जांच परिवार के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो सकता है कि बरामद अवशेषों का 2011 में लापता हुए आशीष सोम से कोई संबंध है या नहीं।