मिजोरम-अगरतला : त्रिपुरा और मिजोरम के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद का शांतिपूर्ण समाधान तलाशने के लिए दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों ने अगरतला में पहले दौर की बातचीत की। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी और उम्मीद जताई कि बातचीत के जरिए विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान निकाला जा सकेगा। त्रिपुरा और मिजोरम के बीच करीब 109 किलोमीटर लंबी अंतरराज्यीय सीमा है। सीमा से लगे पहाड़ी इलाके में स्थित दूर-दराज का गांव फुलदुंगसेई दोनों राज्यों के बीच विवाद का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। त्रिपुरा और मिजोरम दोनों ही इस गांव पर अपना अधिकार होने का दावा करते हैं। साहा ने संवाददाताओं से कहा कि दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों के बीच पहले दौर की बैठक बृहस्पतिवार को अगरतला स्थित सरकारी गेस्ट हाउस में हुई। उन्होंने कहा कि उन्हें फिलहाल बैठक के विस्तृत नतीजों की जानकारी नहीं मिली है और जानकारी मिलने के बाद वह इसके बारे में बताएंगे।
बातचीत से समाधान की उम्मीद
मुख्यमंत्री ने बताया कि हाल में मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा के साथ हुई बैठक में उन्होंने सीमा विवाद का मुद्दा उठाया था। साहा के अनुसार, लालदुहोमा ने विवाद को बातचीत और शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने पर सहमति जताई थी। उन्होंने कहा कि मुख्य सचिवों की ताजा बैठक इस दिशा में उठाया गया अगला महत्वपूर्ण कदम है। दोनों राज्य लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद को आपसी बातचीत के माध्यम से सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं।
टीटीएएडीसी चुनाव में एनडीए की बड़ी जीत का दावा
मुख्यमंत्री साहा ने त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (टीटीएएडीसी) की ग्राम समितियों के आगामी चुनाव को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) चुनाव में भारी अंतर से जीत हासिल करेगा। साहा ने कहा कि अप्रैल में सीटों के बंटवारे को लेकर टिपरा मोथा पार्टी (टीएमपी) के साथ सहमति नहीं बन पाई थी, लेकिन इस बार भाजपा, टीएमपी और इंडिजीनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) एकजुट होकर एनडीए के रूप में चुनाव लड़ने पर सहमत हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री ने इन दलों के बीच हुए सीट बंटवारे के समझौते का विवरण साझा नहीं किया। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों की समितियां पहले से तय दिशा-निर्देशों के आधार पर सीट बंटवारे की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में जुटी हैं। नामांकन वापस लेने की प्रक्रिया शुक्रवार शाम समाप्त होने के बाद चुनावी तस्वीर और स्पष्ट हो जाएगी। छठी अनुसूची के तहत आने वाले क्षेत्रों की 587 ग्राम समितियों के लिए मतदान 28 सितंबर को होगा।