अगरतला : त्रिपुरा हाई कोर्ट ने त्रिपुरा ट्राइबल एरियाज ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल (TTAADC) के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) और अन्य अधिकारियों की सैलरी रोकने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि पूर्व कर्मचारियों को मंजूर किए गए रिटायरमेंट लाभों का भुगतान होने तक यह रोक जारी रहेगी। हालांकि, ग्रुप-C और ग्रुप-D कर्मचारियों को इस निर्देश से बाहर रखा गया है। यह निर्देश न्यायमूर्ति टी. अमरनाथ गौड़ की एकल पीठ ने 9 सितंबर को दिया था। मामला TTAADC के पूर्व कर्मचारी रसन देबबर्मा रेआंग की ओर से दायर रिट याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने शिकायत की थी कि परिषद ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान उनके रिटायरमेंट लाभों को मंजूरी दी और आवश्यक मेमोरेंडम भी जारी किए, लेकिन रकम की गणना हो जाने के बावजूद भुगतान नहीं किया गया।
फाइनेंस सेक्रेटरी की भूमिका पर उठे सवाल
8 सितंबर की सुनवाई के दौरान TTAADC की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि राज्य के फाइनेंस सेक्रेटरी को मामले में पक्षकार बनाया जाना चाहिए, क्योंकि भुगतान के लिए परिषद को राज्य सरकार की मदद की जरूरत है। इस पर हाई कोर्ट ने एडवोकेट जनरल से सहायता मांगी। निर्देश मिलने के बाद एडवोकेट जनरल ने अदालत को बताया कि TTAADC के पास अपना फंड है और पहले से मंजूर रकम जारी करने के लिए फाइनेंस सेक्रेटरी की मंजूरी जरूरी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में फाइनेंस सेक्रेटरी की कोई भूमिका नहीं है और उन्हें पक्षकार बनाने की आवश्यकता नहीं है। इसके बाद अदालत ने प्रतिवादियों से पूछा कि स्वीकृत भुगतान जारी करने में कितना समय लगेगा और क्या कोई कानूनी बाधा इसके आड़े आ रही है। हालांकि, TTAADC के वकील ने फाइनेंस सेक्रेटरी की मदद की जरूरत पर जोर दिया।
रेआंग को 16.33 लाख रुपये मंजूर
अदालत के आदेश में तीन संबंधित रिट याचिकाओं में स्वीकृत रिटायरमेंट लाभों का विवरण भी दर्ज किया गया है। WP(C) No. 658/2026 में रसन देबबर्मा रेआंग के पक्ष में 16,33,750 रुपये मंजूर किए गए थे। वह 31 जनवरी 2025 को सेवानिवृत्त हुए थे और उनके लाभों की मंजूरी 15 जुलाई 2025 को जारी की गई थी। अन्य दो याचिकाओं में स्वीकृत राशि 10 लाख रुपये से 31.68 लाख रुपये के बीच थी।
CEO और अधिकारियों को भुगतान जारी कराने के निर्देश
हाई कोर्ट ने TTAADC के CEO, सेक्रेटरी (फाइनेंस) और संबंधित जिला ट्रेजरी अधिकारियों को मामले की जांच करने तथा पूर्व कर्मचारियों को मंजूर रिटायरमेंट लाभ जारी करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी।
रिटायरमेंट लाभों पर पहले भी कोर्ट दे चुका है निर्देश
TTAADC के सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लाभों से जुड़ा मामला इससे पहले भी त्रिपुरा हाई कोर्ट के सामने आया है। जून 2026 में एक मामले में अदालत ने कहा था कि लंबे समय से सेवानिवृत्त कर्मचारियों को उनके ग्रेच्युटी, लीव एनकैशमेंट और पेंशन कम्यूटेशन जैसे लाभों से अनिश्चित अवधि तक वंचित नहीं रखा जा सकता। अदालत ने संबंधित लाभ ब्याज सहित जारी करने का निर्देश दिया था। हाई कोर्ट के इस निर्देश के बाद त्रिपुरा में राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। माकपा के राज्य सचिव और विपक्ष के नेता जितेंद्र चौधरी ने इसे रिटायरमेंट लाभों के भुगतान के मामले में असाधारण न्यायिक हस्तक्षेप बताया है।