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इस बजट में गृह ऋण की ब्याज दर घटने की संभावना, बजट की ओर टिकी मध्यम वर्ग की नजर

आगामी केंद्रीय बजट को लेकर मध्यम वर्ग और घर खरीदने की योजना बना रहे लोगों में उम्मीदें तेज़ होती जा रही हैं।

दिल्ली, इंद्राणी : आगामी केंद्रीय बजट को लेकर मध्यम वर्ग और घर खरीदने की योजना बना रहे लोगों में उम्मीदें तेज़ होती जा रही हैं। खासतौर पर गृह ऋण की ब्याज दरों में कमी की संभावना को लेकर रियल एस्टेट और बैंकिंग सेक्टर में व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। रियल एस्टेट संगठनों ने सरकार से मांग की है कि होम लोन के ब्याज पर आयकर छूट की सीमा 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये की जाए। उनका मानना है कि इससे मध्यम आय वर्ग को बड़ी कर राहत मिलेगी और नए घर खरीदने की रुचि बढ़ेगी।

आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि महंगाई दर फिलहाल कुछ हद तक नियंत्रण में है और आवास क्षेत्र को गति देने के लिए सरकार तथा भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) मिलकर कुछ सकारात्मक कदम उठा सकते हैं। वर्तमान में अधिकांश बैंकों में गृह ऋण की ब्याज दरें 8.5 से 9.5 प्रतिशत के बीच बनी हुई हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि बजट के बाद आरबीआई रेपो रेट में कटौती का संकेत देता है, तो बैंकों द्वारा होम लोन की ब्याज दरें घटाई जा सकती हैं।

ब्याज दरों में कमी से मासिक ईएमआई कम होगी, जिससे अधिक लोग घर खरीदने का फैसला लेने के लिए प्रेरित होंगे। साथ ही, यदि बजट में होम लोन के ब्याज पर आयकर छूट की सीमा बढ़ाई जाती है, तो गृहनिर्माण ऋण का कुल बोझ और हल्का हो जाएगा।

रियल एस्टेट क्षेत्र का दावा है कि इस तरह के कदमों से न केवल आवासीय संपत्तियों की मांग बढ़ेगी, बल्कि निर्माण उद्योग में रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। कुल मिलाकर, यदि इस बजट में गृह ऋण की ब्याज दरों में राहत या कर छूट बढ़ाने की घोषणा होती है, तो यह मध्यम वर्ग के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है। अब सबकी निगाहें 1 फरवरी पर टिकी हैं, जब यह साफ होगा कि सरकार बजट में क्या बड़ा ऐलान करती है।

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